पश्चिम बंगाल: देशभर के 12 अलग-अलग राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रकिया को लेकर राजनीतिक टकराव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एसआईआर प्रक्रिया को “अराजक, बलपूर्वक और खतरनाक” बताया। और इसे लेकर चुनाव आयोग को तीन पेज का एक पत्र लिखकर इसे रोकने की मांग की तो इसके ठीक एक दिन बाद गृह मंत्री अमित शाह की प्रतिक्रिया सामने आई है। किसी राजनीतिक दल का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया में बाधा डालकर घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
Highlights:
4 नवंबर से 4 दिसम्बर तक 12 राज्यों में प्रक्रिया जारी
दरअसल चुनाव आयोग की पहल पर बीते 4 नवंबर में देश के 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में इन दिनों SIR की प्रकिया जारी है. इन राज्यों में प. बंगाल और तमिलनाडु भी शामिल हैं, जहां अगले छह महीनों के अंदर विधानसभा चुनाव होने हैं. इसके अलावा अंडमान और निकोबार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी SIR की दूसरी प्रक्रिया जारी है और यह 4 दिसंबर तक चलेगा. मतदाता सूची का मसौदा नौ दिसंबर को जारी होगा तो वहीं अंतिम मतदाता सूची सात फरवरी को प्रकाशित की जाएगी।
सात BLO पर नोटिस जारी
बिहार में विधानसभा चुनाव के ठीक पहले हुए SIR को लेकर बिहार में काफी बवाल हुआ था, मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा. लेकिन अभी भी SIR को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है. ताजा मामला प. बंगाल से जुड़ा हुआ है, जहां चुनाव आयोग ने सात BLO को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. चुनाव आयोग ने कोलकाता के बेलियाघाटा निर्वाचन क्षेत्र के सात BLO को SIR के गणना प्रपत्र के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया में खामियों का हवाला देते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। BLO को यह बताने का निर्देश दिया गया है कि वे सौंपे गए कार्यों को ठीक से पूरा करने में क्यों विफल रहे। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट पहले से ही उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें पूरे भारत में SIR करने के चुनाव आयोग के फैसले की वैधता को चुनौती दी गई है। बीते 11 नवंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने DMK, CPI(M), पश्चिम बंगाल कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की याचिकाओं पर पोल पैनल से अलग-अलग जवाब मांगे थे, जिनमें तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के SIR को चुनौती दी गई थी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जारी किया बयान
SIR को लेकर नेताओं के बयान की बात करें तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार यानी कल 21 नवंबर को गुजरात के कच्छ जिले के भुज में BSF के 61वें स्थापना दिवस समारोह में कहा कि बिहार चुनाव में भाजपा नीत राजग की जीत “देश में घुसपैठियों के खिलाफ जनादेश” है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में बनाए रखना चाहते हैं. इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर किए एक पोस्ट में भी लिखा, “भारत में घुसपैठ रोकना न केवल देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रदूषित होने से बचाने के लिए भी घुसपैठ को रोकना आवश्यक है, लेकिन दुर्भाग्य से कुछ राजनीतिक दल इन घुसपैठियों को बचाने में लगे हैं और वे चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची में किए जा रहे शुद्धिकरण के खिलाफ हैं।”
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने साधा निशाना
इस बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में चल रहे मतदाता सूची के SIR अभियान पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा, ”उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट अच्छी बने ये सभी चाहते हैं लेकिन बीजेपी यहां SIR के नाम खेल करना चाहती है. ये खेल हमें बिहार को देखने को मिला. वहां आरजेडी उन सीटों पर भी हार गई जहां वो मजबूत स्थिति में थी.” उन्होंने कहा, ”बिहार में SIR में सबसे ज्यादा वोट कटे थे. वहां आरजेडी हार गई. इसलिए SIR में समय मिलना चाहिए. चुनाव आयोग बीजेपी से मिला हुआ है. यूपी में शादियों का सीजन चल रहा और राज्य में SIR की प्रक्रिया चल रही है.” उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का SIR से विरोध नहीं है. लेकिन जिस तरह और जिस समय ये प्रक्रिया चल रही है उससे सवाल खड़ा होता है.
ममता बनर्जी ने SIR को अराजक, बलपूर्वक और खतरनाक बताया
ममता बनर्जी ने कहा कि अधिकांश BLO. प्रशिक्षण की कमी, सर्वर विफलताओं और बार-बार डेटा बेमेल होने के कारण ऑनलाइन फॉर्म भरने में संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस स्पीड से यह लगभग तय है कि 4 दिसंबर तक विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता डेटा को अपेक्षित सटीकता के साथ अपलोड नहीं किया जा सकेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अत्यधिक दबाव और दंडात्मक कार्रवाई के डर” के तहत, कई लोगों को “गलत या अधूरी प्रविष्टियां” करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे वास्तविक मतदाताओं के मताधिकार से वंचित होने और “मतदाता सूची की अखंडता को नुकसान” पहुंचने का खतरा है।


