Saturday, October 31, 2026

सदर अस्पताल में मरीजों को मिला फंगस लगा दवा

रांची :  रांची के सदर अस्पताल से एक मामला सामने आया है। यहां एक मरीज को डॉक्टर की सलाह पर दी गई टैबलेट में फंगस निकल आया।  इस घटना के बाद अस्पताल की ओर से जांच शुरू कर दी गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर यह गलती कैसे हुई और फंगस वाली दवा मरीज तक कैसे पहुंच गई।

क्या है पूरा मामला

यह मामला रांची के सदर अस्पताल का है। जानकारी के अनुसार, एक मरीज की परिजन  ज्योति शर्मा  इलाज के लिए सदर अस्पताल गई थीं। डॉक्टर ने उन्हें दर्द कम करने के लिए पैरासिटामोल टैबलेट (Paracetamol – 650 mg) लिखी थी। ज्योति शर्मा ने जब घर जाकर वह दवा खाने के लिए दवा देखी, तो उन्होंने देखा कि टैबलेट में फंगस जमी हुई है। दवा की सतह पर सफेद और काले धब्बे जैसे कुछ दिखीई दें रहा था, जो साफ तौर पर खराब होने का संकेत था।

फंगस वाली दवा देखकर दंपती हैरान

ज्योति शर्मा  देखकर चौंक गए कि अस्पताल की ओर से दी गई दवा में फंगस लगी है। उन्होंने तुरंत दवा खाना बंद कर दिया और वापस अस्पताल जाकर इसकी जानकारी दी। इसकी लिखित शिकायत उन्होंने  डीएस से की ।

अस्पताल प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। दवा के सैंपल को सुरक्षित रख लिया गया है ताकि लैब में जांच कराई जा सके कि फंगस कैसे और क्यों पड़ी।

डॉक्टरों और स्टाफ से पूछताछ शुरू

घटना के बाद सदर अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। अस्पताल प्रशासन ने फार्मेसी सेक्शन के कर्मचारियों से भी पूछताछ की है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह दवा कब खरीदी गई थी, कब तक उसकी एक्सपायरी थी और स्टॉक में बाकी दवाओं की स्थिति क्या है।

अधिकारियों का कहना है कि दवा वितरण के दौरान लापरवाही हुई हो सकती है या फिर दवा का स्टोरेज सही तरीके से नहीं हुआ। अस्पताल में दवाओं को ठंडी और सूखी जगह पर रखने के निर्देश होते हैं । स्टोरेज में नमी या गलत तापमान के कारण दवा में फंगस  लग गई होगी।

फार्मेसी स्टॉक की जांच के आदेश

ज्योति  शर्मा  शिकायत के मामले के बाद अस्पताल प्रशासन ने पूरे फार्मेसी स्टॉक की जांच के आदेश दे दिए हैं। यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि बाकी मरीजों को ऐसी कोई खराब दवा न मिले। सभी दवाओं की बैच संख्या, एक्सपायरी डेट और पैकिंग की स्थिति को चेक की जाए।

साथ ही, अस्पताल प्रबंधन ने यह भी तय किया है कि भविष्य में दवा वितरण से पहले उनकी फिजिकल वेरिफिकेशन (Physical Verification) की जाएगी। इसका मतलब है कि अब दवाओं को मरीज को देने से पहले स्टाफ खुद देखकर सुनिश्चित करेगा कि दवा सही और सुरक्षित है या नहीं।

स्वास्थ्य विभाग भी हुआ सतर्क

स्वास्थ्य विभाग यह भी देख रहा है कि कहीं यह दवा किसी निजी कंपनी से सप्लाई की गई तो नहीं, और क्या अन्य अस्पतालों में भी यही दवा भेजी गई है। यदि ऐसा पाया गया, तो उस बैच की सभी दवाओं को बाजार से हटाने का आदेश दिया जा सकता है। उस बैच की सभी दवाइयां पर अब रोक लगा दिया है।

मरीजों की सुरक्षा पर उठे सवाल

इस घटना के बाद रांची के सदर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। लोग कह रहे हैं कि अगर सरकारी अस्पतालों में ही मरीजों को ऐसी फंगस लगी दवाएं मिलने लगें, तो आम लोगों का भरोसा कैसे बना रहेगा? मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन इस तरह की घटनाएं लापरवाही की ओर इशारा करती हैं।

कई लोगों का कहना है कि यह घटना केवल एक मरीज की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की गलती का परिणाम है। अस्पताल प्रशासन को जल्द से जल्द ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।

अस्पताल प्रशासन की सफाई

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने यह भी कहा कि मरीजों को किसी भी तरह की पुरानी या फंगस लगी दवा नहीं दी जाएगी। अगर किसी को ऐसी दवा मिलती है तो तुरंत फार्मेसी या अस्पताल प्रशासन को सूचित करना चाहिए। अस्पताल प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और दवा वितरण इकाई ने यह साफ किया है कि दवा की  expiry 2026 में होगी।

हालांकि, फिलहाल मरीज ज्योति शर्मा सुरक्षित हैं और उन्होंने समय रहते दवा खाने से मना कर दिया था।  यह घटना रांची के स्वास्थ्य विभाग के लिए एक चेतावनी है। अस्पतालों में दवाओं की गुणवत्ता जांच और स्टोरेज की निगरानी बेहद जरूरी है। एक छोटी सी लापरवाही किसी मरीज की जान तक ले सकती है।

एयर नाऊ स्पेशल

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