पलामू: जिले के पांकी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां प्रसव कराने आई महिलाओं और उनके परिजनों से अवैध वसूली किए जाने के आरोप लगे हैं। सरकार जहां निःशुल्क प्रसव सेवा का दावा करती है, वहीं अस्पताल में “पहले पैसा, फिर इलाज” का खेल चलने की बात सामने आ रही है।
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पीड़ित परिवारों का कहना है कि अस्पताल कर्मियों द्वारा अलग-अलग बहानों से पैसे की मांग की जाती है। पैसे नहीं देने पर मरीजों को देर रात गंभीर स्थिति बताकर बड़े अस्पताल रेफर करने की धमकी दी जाती है। हैरानी की बात यह है कि जिन मरीजों को पहले गंभीर बताकर रेफर करने की बात कही जाती है, उन्हीं का पैसा मिलने के बाद उसी अस्पताल में सामान्य प्रसव करा दिया जाता है। इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि बिना पैसे दिए उचित इलाज नहीं किया जाता और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है।
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मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान, सख्त कार्रवाई के निर्देश
पलामू जिले के पांकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के नाम पर अवैध वसूली और लापरवाही के गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संज्ञान लिया है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि इस मामले में अविलंब जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और इसकी रिपोर्ट उन्हें शीघ्र उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त न करने की बात कही है।
ANM और 3 अन्य नर्स हटीं
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने पांकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में सामने आए गंभीर लापरवाही मामले में त्वरित कार्रवाई की है। विभाग ने लेबर रूम में तैनात एएनएम को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए लेबर रूम में कार्यरत तीन अन्य नर्सों को भी हटा दिया गया है। इनमें एक नियमित नर्स तथा दो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत नर्सें शामिल हैं।
सभी संबंधित कर्मियों के खिलाफ आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पूरे मामले की जांच जारी है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।


