Saturday, June 20, 2026

भाजपा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर महिला आरक्षण कानून पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की

रांची : झारखंड प्रदेश भाजपा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। इस संबंध में पार्टी ने अपने विभिन्न सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट शेयर कर पत्र को साझा किया है। साझा किये गये पत्र में भाजपा ने लिखा है कि पिछले महीने केंद्र सरकार ने तीन दिनों का विशेष सत्र बुलाकर इस कानून में संविधान संशोधन बिल लाया था लेकिन विपक्ष के सहयोग के अभाव में यह पारित नहीं हो सका। ऐसे में देश की आधी आबादी आगामी 2029 में होने वाले लोकसभा व राज्यों के विधानसभा चुनाव में अपने एक तिहाई अधिकार से वंचित रह गई हैा

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मुख्यमंत्री को लिखा भाजपा का पत्र श्री बाबूलाल जी

जैसा कि आपको विदित है कि केन्द्र सरकार द्वारा विगत 16 से 18 अप्रैल, 2026 तक सदन के 3 दिनों का विशेष सत्र आहूत कर देश की आधी आबादी के सशक्तिकरण हेतु ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल’ प्रस्तुत किया गया। दुर्भाग्यवश, विपक्ष के साथियों का अपेक्षित सहयोग न मिल पाने के कारण सदन में यह ‘बिल’ पारित नहीं हो पाया। इस बिल के पारित हो जाने से जहां पूरे देश की आधी आबादी को 2029 से ही प्रतिनिधित्व का ऐतिहासिक अवसर मिलता.

इधर झारखंड प्रदेश में भी 14 लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 21 हो जाती, जिसमें 7 लोकसभा क्षेत्रों में महिला जनप्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। इसी प्रकार विधानसभा सीटों की संख्या 81 से बढ़कर 121 हो जाती, जिसमें 41 विधानसभा क्षेत्रों में महिला जनप्रतिनिधित्व को अवसर मिल पाता। इससे झारखंड की संस्कृति एवं झारखंडी इतिहास में सदैव महिलाओं को प्रतिनिधित्व सहित सभी प्रकार की निर्णय प्रक्रिया, चाहे वह सामाजिक हो या राजनैतिक में महत्वपूर्ण स्थान और सम्मान दिया है। वीरांगना फूलो-झानो की इस धरती पर निवासरत झारखंड की बहनों की यह आशा है कि मा. मुख्यमंत्री जी, आप स्वयं महिला सशक्तिकरण के सशक्त पैरोकार रहे हैं।

अतः इस झारखंड की भूमि पर इतिहास रचने का कार्य करें एवं राज्यपाल की अनुमति से झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र आहूत कराकर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल’ को पारित कर केन्द्र सरकार से पुनः इसे सदन में पारित कराने का आग्रह करें। आपके इस ऐतिहासिक कदम से झारखंड की आधी आबादी के लिए बहुप्रतिक्षित न्याय का मार्ग प्रशस्त संभव हो सकेगा। आशा है कि आप दलगत भावना से ऊपर उठकर इस महत्वपूर्ण सामाजिक सरोकार के विषय पर गंभीरता से निर्णय लेने का कष्ट करेंगे।

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