दिल्ली : मकर संक्रांति सूर्य आराधना का मुख्य पर्व है। इस दिन सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत होती है। शास्त्रों में उत्तरायण को देवताओं का दिन कहा गया है। इस वर्ष सूर्य 14 जनवरी की रात 9:19 मिनट में मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही खरमास समाप्त हो जाएगा।
Highlights:
मकर संक्रांति कब मनाई जाएगी
शास्त्रों के अनुसार यदि संक्रांति प्रदोष काल के बाद रात में होती है, तो मकर संक्रांति का पर्व अगले दिन माना जाता है। इसी नियम के कारण इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी, गुरुवार को मनाई जाएगी। मकर संक्रांति दही-चूड़ा के बिना अधूरी मानी जाती है। दही शुभता, चूड़ा समृद्धि और गुड़ रिश्तों में मिठास का प्रतीक है। सूर्य के उत्तरायण होने पर शरीर में पित्त बढ़ता है, जिसे दही-चूड़ा संतुलित करता है। यह हल्का और ऊर्जा देने वाला भोजन है। इस दिन तिल का विशेष महत्व है। तिल नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और सकारात्मकता लाता है। काले तिल शनि और पितरों के लिए, जबकि सफेद तिल सूर्य और सुख-समृद्धि के लिए शुभ माने जाते हैं।
तिल का उपयोग
मकर संक्रांति के दिन पानी में काले तिल डालकर स्नान करना चाहिए, तिल के लड्डू या तिल से बने व्यंजन का भोग लगाना चाहिए, तिल, गुड़ और खिचड़ी का दान, और शनि मंदिर में तिल के तेल का दीपक जलाना चाहिए।


