नई दिल्ली : पीएम मोदी ने लाल क़िले से महिला आरक्षण के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों से सहयोग करने की मांग की. पीएम मोदी ने लाल क़िले से अपने भाषण में कहा, “मैं देश के सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं कि आइए महिला आरक्षण लागू कर के महिला सम्मान में आप भी जुड़िए.” इस मुद्दे पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.
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कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “प्रधानमंत्री ने आज लाल क़िले से अपने संबोधन में महिला आरक्षण को लेकर एक ग़लत दावा किया. उन्हें मालूम होना चाहिए कि सितंबर 2023 में संसद ने सर्वसम्मति से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया था. लेकिन मोदी सरकार के दोहरे मानदंड और ढोंग के कारण यह 2024 के चुनावों से ही लागू नहीं हो सका. इस अधिनियम को 16 अप्रैल 2026 की देर शाम आनन-फानन में और चुपचाप अधिसूचित किया गया.”
जयराम रमेश ने कहा कि महिला आरक्षण को लोकसभा की मौजूदा सदस्य संख्या के भीतर ही 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू करने के अपने स्टैंड पर लगातार कायम रही है.
2023 में पास हो चुका कानून
केंद्र सरकार साल 2023 में संसद में नारी शक्ति वंदन विधेयक लेकर आई थी. इसे कांग्रेस समेत ज़्यादातर विपक्षी दलों के सहयोग से पारित कर दिया गया था. इस अधिनियम में महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया था, लेकिन इसके लागू होने को सरकार ने ही भविष्य में होने वाली जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ दिया था.
फिर इसी साल 16 से 18 अप्रैल को बुलाए गए संसद के विशेष सत्र इसमें संशोधन के लिए विधेयक पेश किया गया, लेकिन महिला आरक्षण क़ानून में संशोधन वाला बिल (131वां) पास नहीं हो सका था. एनडीए बिल के पक्ष में दो तिहाई वोट हासिल करने में नाकाम रहा था.
कांग्रेस की आपत्ति
इसके बाद राहुल गांधी ने तमिलनाडु में एक जनसभा में कहा था, “वे महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए एक बिल पास करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन उस बिल के पीछे एक बहुत ही ख़तरनाक इरादा छिपा था. वे भारत के चुनावी नक्शे को बदलने की कोशिश कर रहे थे.” कांग्रेस पार्टी लगातार साल 2023 में पारित क़ानून के आधार पर महिलाओं को आरक्षण देने की मांग करती रही है.

