नई दिल्ली : दिल्ली के जंतर मंतर पर पेपर लीक मामले को लेकर बीते कई दिनों से जारी प्रदर्शन का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक मामले पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए कहा कि इस मामले को ऐसे ही नहीं जाने दे सकते. ‘फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन’ (एफएआईएमए) के आवेदन समेत कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि केंद्र सरकार परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने, राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू करने और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) के मॉडल को अपनाने के लिए क्या कदम उठा रही है.
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3 अगस्त को अगली सुनवाई
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ‘हम छात्रों के हितों को लेकर हम बहुत गंभीर है. राधाकृष्णन कमिटी की रिपोर्ट लागू की जाएगी, लेकिन सरकार इससे कहीं बढ़ कर कदम उठाएगी. बहुत सी बातें होने वाली हैं.’ सॉलिसिटर जनरल तुषार ने कोर्ट से एक हफ्ते का समय भी मांगा. उन्होंने कहा कि हम कोर्ट को विस्तृत जानकारी देंगे. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा, ‘ठीक है. हम भी यही चाहते हैं कि पूरी व्यवस्था चाक-चौबंद हो. आप जवाब दाखिल कीजिए. सोमवार, 3 अगस्त को सुनवाई होगी.’
अगले साल सीबीटी की करें तैयारी
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा, ‘नीट-यूजी परीक्षा के लिए अगले साल से कंप्यूटर आधारित परीक्षा कराने की राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की योजना को देखते हुए, सरकार से साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा पर ठोस कदम उठाने की उम्मीद की जाती है.’ कोर्ट ने यह भी कहा कि हम नीट पेपर लीक मामले को लेकर उठाए गए कदमों पर नजर रखेंगे.


