रांची : लॉरेंस बिश्नोई और अमन साहू गिरोह से जुड़े कुख्यात अपराधी सुनील मीणा को अब रांची से जमशेदपुर की जेल में शिफ्ट किया जाएगा। यह कदम सुरक्षा कारणों और गैंग गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए उठाया गया है। राज्य प्रशासन ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिया है।
बड़े अपराधी के रूप में कुख्यात सुनील मीणा
सुनील मीणा का नाम कई गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़ा रहा है। पुलिस के अनुसार, वह लॉरेंस बिश्नोई और अमन साहू गिरोह के लिए सक्रिय रूप से काम करता था। उस पर धमकी, रंगदारी वसूली, और अवैध हथियारों के कारोबार में शामिल होने के आरोप हैं। जांच एजेंसियों को शक है कि वह जेल में रहते हुए भी अपने गैंग के जरिए आपराधिक गतिविधियों को संचालित कर रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए उसे एक हाई सिक्योरिटी जेल में शिफ्ट करने का फैसला लिया गया है।
गिरोहों पर नकेल कसने की कोशिश
राज्य सरकार और पुलिस विभाग ने हाल के महीनों में गैंगस्टरों पर शिकंजा कसने के लिए सख्त अभियान शुरू किया है। विशेष रूप से लॉरेंस बिश्नोई और अमन साहू गैंग की गतिविधियां झारखंड में लगातार बढ़ रही थीं। अधिकारियों का कहना है कि इन गैंगों से जुड़े अपराधियों की जेल में मौजूदगी के कारण गैंग के सदस्यों को बाहर से भी समर्थन मिल जाता है। इसी वजह से प्रशासन अब ऐसे अपराधियों को एक जेल से दूसरी जेल में शिफ्ट कर रहा है ताकि उनके नेटवर्क को तोड़ा जा सके।
हाई सिक्योरिटी व्यवस्था में रहेगा मीणा
सुनील मीणा को जमशेदपुर जेल में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रखा जाएगा। जेल प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि उसके मुलाकातियों पर विशेष नजर रखी जाए और फोन या किसी अन्य माध्यम से बाहरी संपर्क पर सख्त पाबंदी लगाई जाए।
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जानकारी के मुताबिक, मीणा को हाई सिक्योरिटी बैरक में रखा जाएगा और उसके सेल में किसी भी तरह की गैंग गतिविधि न हो, इसके लिए सीसीटीवी निगरानी भी बढ़ाई जाएगी।
कई राज्यों में फैला नेटवर्क
जांच एजेंसियों का मानना है कि लॉरेंस बिश्नोई और अमन साहू गैंग का नेटवर्क केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि कई राज्यों में फैला हुआ है। सुनील मीणा पर आरोप है कि वह इन राज्यों में गैंग के संपर्क में रहकर रंगदारी और हथियारों के लेनदेन में शामिल था। पुलिस को संदेह है कि वह जेल में रहते हुए भी अपने गुर्गों के जरिए कई वारदातों की साजिश रचता रहा है। इसलिए उसका एक ही जेल में लंबे समय तक रहना सुरक्षा की दृष्टि से खतरा माना गया।
पुलिस और जेल प्रशासन में बढ़ी सख्ती
हाल के दिनों में राज्य में गैंगवार और रंगदारी की घटनाएं बढ़ी हैं। इस वजह से पुलिस और जेल प्रशासन ने निगरानी को और सख्त कर दिया है। विशेष शाखा की टीमें नियमित रूप से जेलों का निरीक्षण कर रही हैं और आपराधिक नेटवर्क पर नकेल कसने की तैयारी में जुटी हैं। जेलों में मोबाइल, अवैध लेन-देन और अन्य गतिविधियों को रोकने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया जा रहा है। मीणा जैसे हाई प्रोफाइल अपराधियों पर खास निगरानी रखी जाएगी ताकि गैंग का संचालन जेल से न हो सके।
राज्य सरकार की रणनीति
राज्य सरकार ने ऐसे अपराधियों की पहचान कर उन्हें अलग-अलग जेलों में शिफ्ट करने की रणनीति बनाई है ताकि किसी एक जेल में उनका गैंग न बन सके। अधिकारियों का कहना है कि इससे उनके नेटवर्क को कमजोर करने में मदद मिलेगी और जेलों में सुरक्षा व्यवस्था भी बेहतर रहेगी।
जनता में बढ़ी उम्मीद
इस कार्रवाई के बाद लोगों में उम्मीद जगी है कि गैंगस्टर गतिविधियों पर रोक लगेगी और आम नागरिक खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करेंगे। कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर जो दबाव था, इस कदम से उसे राहत मिल सकती है। सुनील मीणा का जमशेदपुर जेल में ट्रांसफर केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि एक बड़ा रणनीतिक कदम है। इसका उद्देश्य अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ना, जेल से गैंग संचालन को रोकना और आम जनता को सुरक्षित माहौल देना है। राज्य प्रशासन का कहना है कि अपराधियों को अब किसी भी हाल में जेल के अंदर से गैंग चलाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। इस कदम से गैंगवार और रंगदारी जैसे अपराधों पर नियंत्रण की उम्मीद की जा रही है। यह साफ संकेत है कि झारखंड में अपराधियों के लिए अब जेल भी सुरक्षित ठिकाना नहीं रहेगा।


