Tuesday, July 21, 2026

झारखंड में सर्पदंश अधिसूचित बीमारी घोषित, अस्पतालों के लिए रिपोर्ट देना अनिवार्य, अधिसूचना जारी

रांची : स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने राज्य में सर्पदंश के बढ़ते मामलों और इससे होने वाली मृत्यु दरों को नियंत्रित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. झारखंड सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना जारी करते हुए अब सर्पदंश के मामलों और इससे होने वाली मौतों को अधिसूचित बीमारी घोषित कर दिया है. इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी गई. जारी अधिसूचना के अनुसार अब सभी सरकारी व निजी अस्पतालों के अलावा मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग होम, रेलवे व आर्मी अस्पताल के अलावा आयुष संस्थानों को सर्पदंश के हर मामले की जानकारी देना अनिवार्य होगा.

जारी अधिसूचना के मुख्य बिंदु

स्वास्थ्य विभाग के जारी अधिसूचना के मुताबिक सभी स्वास्थ्य संस्थानों को हर महीने की 5 तारीख और 20 तारीख तक अपने क्षेत्र के सिविल सर्जन को रिपोर्ट सौंपनी होगी. इसमें सर्पदंश से जुड़ी सभी जानकारियों को IDSP-IHIP पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा. इसके लिए संस्थानों को एक अलग रजिस्टर भी संधारित करनी होगी. इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर मेडिकल कॉलेजों तक एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है. यह अधिसूचना Clinical Establishment Act 2010 के तहत जारी की गई है। यदि कोई निजी या सरकारी संस्थान सर्पदंश के मामले को छिपाता है या रिपोर्ट नहीं करता है, तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा.

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2030 तक का लक्ष्य

भारत सरकार के ‘राष्ट्रीय कार्य योजना 2030 के अनुरूप, झारखंड सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों और विकलांगता में 50% तक की कमी लाना है. आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 30-40 लाख सर्पदंश के मामले सामने आते हैं, जिनमें से 58,000 लोगों की जान चली जाती है.

झारखंड में मानसून और गर्मी के मौसम में ये मामले ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में अत्यधिक बढ़ जाते हैं. अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि झारखंड के ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग सांप के काटने पर अस्पताल जाने के बजाय झाड़-फूंक ओझा-गुणी और पारंपरिक उपचार का सहारा लेते हैं. समय पर सही इलाज न मिलना ही राज्य में सर्पदंश से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण है.

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एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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