मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश की जबलपुर प्रशासन ने बीजेपी विधायक संजय पाठक से जुड़ी तीन खनन कंपनी आनंद माइनिंग, निर्मला मिनरल्स और पेसिफिक एक्सपोर्ट को अतीत में स्वीकृत सीमा से कई गुना अधिक खनन (ओवर-माइनिंग) करने के आरोप में ₹443 करोड़ की वसूली का अंतिम नोटिस भेजा है।
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क्या है पूरा मामला
खनन विभाग की 467 पेज की विस्तृत रिपोर्ट में, सैटेलाइट इमेज, DGPS (Differential Global Positioning System) मैपिंग और डिस्पैच रजिस्टर की जांच के आधार पर यह पाया गया कि इन कंपनियों ने अनुमत खनन क्षेत्र की तुलना में 8 से 10 गुना ज़्यादा लौह अयस्क (आयरन ओरे) निकाला था। रिपोर्ट के आधार पर, जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने 10 नवम्बर 2025 को ये नोटिस जारी किया था। कंपनियों ने पहले तो गणना-विवरण मांगा था लेकिन विभाग ने उन्हें आधार पत्र उपलब्ध करा दिए। अब अगर संतोषजनक जवाब न मिला, तो कुर्की व जब्ती (seizure) की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल
इस कार्रवाई को इस कारण भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पहली बार ऐसा मूल्य-मान (penalty) लगाया गया है, जो सत्ताधारी दल के विधायक यानी अपनी ही पार्टी के नेता से किया जा रहा है। स्वयं राज्य के मुख्यमंत्री मोहन् यादव ने विधानसभा में इस जुर्माने की पुष्टि की थी, जिससे मामला और सुर्खियों में आ गया।
आगे क्या हो सकता है
अधिकारियों का कहना है कि नोटिस के दिए जाने के बाद अब अगला कदम तय किया जाएगा। अगर निर्धारित अवधि में कंपनियों का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो उनकी संपत्तियों की कुर्की या जब्ती की प्रक्रिया शुरू होगी। साथ ही, खनन विभाग जल्द ही RRC (Revenue Recovery Certificate) जारी करने की तैयारी कर रहा है।
संजय पाठक क्यों नहीं बोले?
इस पूरे मामले में संजय पाठक ने अब तक सार्वजनिक तौर पर कोई बयान नहीं दिया है। उनकी मौनता ने सवालों को और तेज कर दिया है कि वह हालात को कैसे संभालेंगे।
पूरे सिस्टम पर सवाल है
यह मामला सिर्फ एक विधायक या खनन कंपनी तक सीमित नहीं है। यह मध्य प्रदेश में खनन गतिविधियों की निगरानी, स्वीकृत सीमा, नियमन और जवाबदेही की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़ा करता है। उनके ऊपर इतनी भारी वसूली तभी हुई है जब विस्तृत तकनीकी निरीक्षण (सैटेलाइट डेटा, DGPS मैपिंग, रजिस्टर जांच) के बाद स्पष्ट किया गया कि स्वीकृत सीमा से बहुत अधिक खनन हुआ। इसका मतलब है कि आगे भी इसी तरह की जांच-छानबीन से अन्य जगहों पर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
यह मामला न सिर्फ राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है, बल्कि मध्य प्रदेश में खनन उद्योग और पर्यावरण संरक्षण दोनों से जुड़ी संवेदनशीलता को लेकर भी नया सन्देश देता है कि चाहे किसी की भी राजनीतिक पहचान हो, नियम की पैमाइश और जवाबदेही से कोई नहीं बच सकता।


