डेस्क : अंतरराष्ट्रीय युवा नेतृत्व और शांति निर्माण के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में, निरज कुमार सिंह ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2250 की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित हाई-लेवल स्टॉकटेकिंग इवेंट में यूथ डेलीगेट के रूप में तीसरी बार भाग लिया। इस दौरान उन्होंने Peacebuilding Commission में भी सक्रिय योगदान दिया।

कार्यक्रम के दौरान निरज कुमार सिंह ने संयुक्त राष्ट्र के Assistant Secretary-General for Youth Affairs फेलिपे पॉलियर (Felipe Paullier) के साथ महत्वपूर्ण संवाद किया। चर्चा का केंद्र युवाओं की शांति निर्माण में भूमिका को सुदृढ़ करना तथा भारतीय युवाओं के लिए वैश्विक मंचों पर अवसरों के विस्तार पर रहा। इस अवसर पर निरज कुमार सिंह ने कहा, “मैं अपने प्रोफेसर, मेंटर और डोनर का हृदय से आभारी हूँ। उनके निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं थी।”
यह उच्चस्तरीय कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र यूथ ऑफिस, डिपार्टमेंट ऑफ पॉलिटिकल एंड पीसबिल्डिंग अफेयर्स (DPPA) तथा यूएनएफपीए (UNFPA) द्वारा सदस्य देशों के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य Youth, Peace and Security (YPS) एजेंडा के अंतर्गत अब तक की वैश्विक प्रगति की समीक्षा करना और भविष्य की रणनीतियों पर विचार-विमर्श करना था।

निरज कुमार सिंह का जन्म बिहार के सारण जिले के पानापुर प्रखंड अंतर्गत पकड़ी नरोत्तम, सतजोड़ा बाजार में हुआ। उनके पिता श्री प्रमोद सिंह तथा माता श्रीमती गीता देवी हैं। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा सतजोड़ा हाई स्कूल से प्राप्त की और उच्च शिक्षा जगदम कॉलेज, छपरा से पूरी की।
उन्होंने राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान (RGNIYD), चेन्नई से मास्टर ऑफ सोशल वर्क (MSW) तथा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई से युवा नेतृत्व और सामाजिक परिवर्तन में विशेषज्ञता हासिल की है। इसके अतिरिक्त, उन्हें आठ दक्षिण एशियाई देशों में युवाओं के विकास, नेतृत्व निर्माण और सामाजिक परिवर्तन के क्षेत्र में कार्य करने का व्यापक अनुभव प्राप्त है।

संयुक्त राष्ट्र में उनकी यह तीसरी सहभागिता युवाओं के नेतृत्व, शांति निर्माण, शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय विकास के क्षेत्र में उनके निरंतर और प्रभावी योगदान को रेखांकित करती है। यह सहभागिता भारत सहित वैश्विक दक्षिण (Global South) के युवाओं की आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सशक्त रूप से प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुई है।


