दिल्ली : दिल्ली में लाल किले के पास हुए ब्लास्ट की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। जैसे-जैसे NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) की पड़ताल गहराई में जा रही है, इस आतंकी मॉड्यूल के कई चौंकाने वाले पहलू सामने आ रहे हैं। जांच में पता चला है कि विस्फोटक जुटाने के लिए मॉड्यूल से जुड़े डॉक्टरों ने अपनी ही सैलरी का पैसा दिया था। बैंक स्टेटमेंट, मोबाइल रिकॉर्ड और चैट में इसकी पुष्टि भी हुई है।
Highlights:
सैलरी से जुटाए गए 26 लाख रुपए
सूत्रों के अनुसार, हरियाणा के फरीदाबाद के धौज और फतेहपुर तगा गांव से जो विस्फोटक और हथियार सामग्री बरामद हुई, उसकी कुल कीमत लगभग 26 लाख रुपए थी। यह पूरा पैसा आतंकी मॉड्यूल से जुड़े डॉक्टरों ने मिलकर दिया।सहारनपुर के फेमस मेडिकेयर अस्पताल में कार्यरत डॉ. आदिल अहमद ने अकेले ही करीब 8 लाख रुपए दिए थे। बैंकिंग लेन-देन का रिकॉर्ड इसकी पुष्टि करता है। NIA अब आदिल के संपर्कों और पैसे के स्त्रोत की और जांच कर रही है।
वॉट्सऐप चैट से खुलासा

जांच एजेंसी को डॉ. आदिल की एक वॉट्सऐप चैट भी मिली है जिसमें वह अस्पताल प्रबंधन से एडवांस सैलरी की अपील करते दिख रहा है। चैट में वह अलग-अलग तारीख पर लिखता है –
- 5 सितंबर : सर, मुझे रुपयों की बहुत जरूरत है, मेरे खाते में डाल दीजिए।
- 6 सितंबर : सर, कृपया कर दीजिए, बहुत आभारी रहूंगा।
- 7 सितंबर : सर, पैसे चाहिए, सैलरी जल्दी चाहिए।
- 9 सितंबर : प्लीज कल कर दीजिए, बहुत जरूरत है।
जांच एजेंसी के अधिकारी मानते हैं कि यह पैसा आतंकी गतिविधियों में ही लगाया गया।

कौन-कौन डॉक्टर हैं मॉड्यूल में शामिल?

जांच में सामने आया है कि चार डॉक्टर इस मॉड्यूल की तैयारी कई महीनों से कर रहे थे- डॉ. आदिल अहमद, डॉ. मुजम्मिल, डॉ. शाहीन सईद, डॉ. उमर नबी। इनमें से डॉ. उमर नबी वही है जो दिल्ली ब्लास्ट में आत्मघाती हमलावर था। वह कार चला रहा था और धमाके में उसकी मौत हो गई।
कश्मीर से दिल्ली का सफर और आतंक से जुड़ाव
डॉ. आदिल मूल रूप से कुलगाम (कश्मीर) का रहने वाला है। उसने श्रीनगर मेडिकल कॉलेज से MBBS किया और बाद में GMC अनंतनाग में रेजिडेंट डॉक्टर रहा। 2024 में उसने नौकरी छोड़ दी और दिल्ली आ गया। दिल्ली में उसकी मुलाकात ऑस्कर अस्पताल में डॉ. अंकुर चौधरी से हुई। बाद में अंकुर ने उसे सहारनपुर के फेमस मेडिकेयर अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. मनोज मिश्रा से मिलवाया और आदिल को वहां 5 लाख रुपए मासिक पर नियुक्त किया गया।
जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ाव और हथियार बरामद
अक्टूबर में श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर लगाए गए थे। जांच में पता चला कि ये पोस्टर डॉ. आदिल ने ही लगाए थे। इसके बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद GMC अनंतनाग में उसके लॉकर की तलाशी ली गई, जिसमें से AK-47 राइफल और अन्य हथियार मिले। इसके बाद आदिल से कड़ी पूछताछ शुरू हुई और उसके कई आतंकी संबंध सामने आए।
शादी और नेटवर्क के नए सुराग
4 अक्टूबर को आदिल की कश्मीर में शादी हुई थी। शादी से लौटकर वह हनीमून की तैयारी कर रहा था, लेकिन इससे पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि शादी में शामिल हुए लोग कौन-कौन थे। यह आशंका है कि इस मॉड्यूल से जुड़े कुछ और लोग भी शादी में शामिल हुए हो सकते हैं।
10 नवंबर का दिल्ली ब्लास्ट
10 नवंबर को सुबह जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया। इस कार्रवाई में डॉ. मुजम्मिल और डॉ. शाहीन को गिरफ्तार किया गया। उनके ठिकानों से मिला 2900 किलो विस्फोटक, असॉल्ट राइफलें और कई आधुनिक हथियार। उसी शाम दिल्ली में लाल किले के पास एक हुंडई i20 कार में धमाका हुआ, जिसमें 15 लोगों की मौत हुई। कार चला रहा डॉ. उमर नबी उसी मॉड्यूल का हिस्सा था।
केमिकल शॉप पर NIA का छापा
गुरुवार को NIA ने फरीदाबाद के नेहरू ग्राउंड स्थित BR Scientific & Chemicals दुकान पर छापा मारा। सूत्रों के अनुसार, डॉ. मुजम्मिल ने विस्फोटक बनाने के लिए जरूरी केमिकल यहीं से खरीदे थे। एजेंसियों ने वहां से कई रिकॉर्ड कब्जे में लिए हैं और उनसे पूरी सप्लाई चैन की जानकारी जुटाई जा रही है। NIA अब तक 2,000 से ज्यादा संदिग्धों से पूछताछ कर चुकी है। एजेंसियों का मानना है कि इस मॉड्यूल का नेटवर्क काफी बड़ा था और कई पढ़े-लिखे लोग इसमें शामिल हो सकते हैं। जांच जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।


