Wednesday, July 22, 2026

बिहार में जमीन विवाद मामलों में 1 फरवरी से लागू होंगे नए नियम, जानें क्या हुआ बदलाव

पटना: बिहार में जमीन विवाद से जुड़े मामलों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि अब पुलिस जमीन का कब्जा दिलाने या जमीन विवाद सुलझाने में सीधे हस्तक्षेप नहीं करेगी। 1 फरवरी 2026 से यह नया नियम पूरे राज्य में लागू कर दिया जाएगा।

क्या है नया नियम?

बिहार सरकार के नए निर्देश के अनुसार अब पुलिस की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित रहेगी। पुलिस बिना कोर्ट या सक्षम अधिकारी के आदेश के किसी जमीन पर कब्जा दिलाने, निर्माण कराने या जमीन विवाद सुलझाने का काम नहीं करेगी। यह नियम 1 फरवरी से पूरे राज्य में लागू होगा। सरकार ने यह फैसला राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को मिले शिकायतों के विश्लेषण के बाद लिया है। कई मामलों में यह सामने आया कि पुलिस जमीन विवाद में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप कर रही थी। नए निर्देश में कहा गया है कि अगर किसी थाना क्षेत्र में जमीन विवाद की जानकारी मिलती है, तो थाना प्रभारी को इसकी लिखित सूचना संबंधित अंचलाधिकारी को देनी होगी। यह सूचना ईमेल या आधिकारिक पोर्टल के जरिए भी भेजी जा सकती है। इससे पुलिस और राजस्व विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी।

डिप्टी सीएम ने क्या कहा?

डिप्टी सीएम और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि अब जमीन विवाद के नाम पर थानों की मनमानी नहीं चलेगी। उन्होंने साफ कहा कि जमीन विवाद राजस्व और न्यायिक प्रक्रिया का विषय है, न कि पुलिस के हस्तक्षेप का। सरकार का कहना है कि अगर बिना आदेश के किसी स्तर पर कब्जा दिलाने या निर्माण कराने की शिकायत मिली तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। नए दिशा-निर्देश के अनुसार जमीन विवाद की सूचना मिलने पर थाना डायरी में अलग से विस्तृत प्रविष्टि करना अनिवार्य होगा। इसमें दोनों पक्षों का नाम-पता, विवाद की प्रकृति, जमीन का पूरा विवरण और पुलिस द्वारा की गई शुरुआती कार्रवाई दर्ज की जाएगी। साथ ही यह भी लिखा जाएगा कि मामला किस राजस्व न्यायालय के क्षेत्र में आता है।

सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?

सरकार को जन कल्याण संवाद कार्यक्रम के दौरान कई शिकायतें मिली थीं कि कुछ मामलों में पुलिस जमीन विवाद में अनावश्यक हस्तक्षेप कर रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पुलिस की भूमिका सीमित करने का फैसला लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से जमीन विवाद के मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी। जमीन विवाद अब राजस्व और न्यायिक प्रक्रिया से सुलझाए जाएंगे, जिससे गलत हस्तक्षेप की संभावना कम होगी। हालांकि शुरुआत में लोगों को नई प्रक्रिया समझने में थोड़ी परेशानी हो सकती है।

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एयर नाऊ स्पेशल

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