रांची : झारखंड सरकार के गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने एनडीपीएस एक्ट 1985 के तहत अफीम, गांजा, हेरोइन, ब्राउन शुगर के अवैध उत्पादन, तस्करी और पेडलिंग को रोकने के लिए पुरस्कार नीति 2026 का गठन किया है. सरकार के अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल द्वारा इस संबंध में शुक्रवार को संकल्प पत्र जारी किया गया है.
Highlights:
जारी संकल्प पत्र के अनुसार, अब ड्रग्स तस्करों की सटीक सूचना देने वाले मुखबिरों और प्रभावी कार्रवाई करने वाले जांबाज सरकारी सेवकों, पुलिसकर्मियों को लाखों रुपये की मौद्रिक पुरस्कार राशि दी जाएगी. यह नीति अधिसूचना जारी होने की तिथि से प्रभावी हो गई है.
इसे भी पढ़ें : प्रतिबंधित नक्सली संगठन PLFI के लिए 50 लाख रुपये की लेवी वसूलने पहुंचे दो युवक गिरफ्तार
प्रभावी कार्रवाई के लिए प्रोत्साहन
सरकार ने माना है कि अफीम, मोर्फीन, हेरोइन, कोकीन, ब्राउन शुगर और गांजा जैसे पदार्थों की तस्करी से समाज में विकराल समस्या खड़ी हो रही है. यह न केवल लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था, विकास और सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है. देश और राज्य का भविष्य यानी आज की युवा पीढ़ी इसकी चपेट में आ रही है. इसी मांग और आपूर्ति की चेन को तोड़ने के लिए इस नई मौद्रिक पुरस्कार नीति को लागू किया गया है, ताकि लोग और पुलिसकर्मी इसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए प्रोत्साहित हों.
इन्हें मिलेगा पुरस्कार
- यह नीति सटीक जानकारी देने वाले मुखबिरों और उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरकारी सेवकों पर लागू होगी.
- जिनकी सटीक सूचना के आधार पर राज्य सरकार की किसी भी ड्रग लॉ एनफोर्समेंट एजेंसी द्वारा मादक पदार्थ, मनःप्रभावी पदार्थ या नियंत्रित पदार्थ की जप्ती की गई हो.
- झारखंड सरकार के वे कर्मी जिन्होंने मादक पदार्थों को सफलतापूर्वक जप्त किया हो, उनका सही तरीके से डिस्पोजल किया हो और बेहतरीन अनुसंधान पूरा किया हो. इसमें अन्य राज्यों या केंद्र सरकार के वे कर्मी भी शामिल हो सकते हैं जिन्होंने इस कानून के उल्लंघन को पकड़ने में मदद की हो.
पुरस्कार की राशि व नियम
- जप्त किए गए मादक पदार्थ के लिए निर्धारित अधिकतम पुरस्कार राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा सूचनादाता को और 50 प्रतिशत हिस्सा सरकारी सेवक, टीम को दिया जाएगा. यदि कोई मुखबिर नहीं है, तो सरकारी सेवक को केवल उसका 50 प्रतिशत हिस्सा ही मिलेगा.
- वेतन मैट्रिक्स 12 और 13 के तहत आने वाले अधिकारी एक मामले में अधिकतम 50 हजार रुपये तक के पुरस्कार के पात्र होंगे. किसी भी सरकारी सेवक को उसके संपूर्ण सेवाकाल में कुल 20 लाख से अधिक की पुरस्कार राशि नहीं दी जाएगी. यह रिकॉर्ड उनकी सेवा पुस्तिका में दर्ज होगा. किसी एक केस में सामान्यतः अधिकतम राशि दो लाख होगी.
- जप्त किए गए ड्रग्स की पॉजिटिव फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के तुरंत बाद कुल पुरस्कार राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा एडवांस, अंतरिम पुरस्कार के रूप में दे दिया जाएगा. अदालत में चार्जशीट या अभियोजन शिकायत दर्ज होने के बाद अंतिम एकमुश्त राशि दी जाएगी.
- मादक पदार्थों के अनुसार अधिकतम पुरस्कार दरें (प्रति किलोग्राम).
- सरकार ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के मानकों के आधार पर विभिन्न पदार्थों के लिए अधिकतम पुरस्कार राशि तय की है.
- कोकीन: 2.40 लाख रुपये प्रति किलोग्राम.
- हेरोइन और उसके साल्ट (ब्राउन शुगर शामिल): 1.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम.
- मोर्फीन बेस: 20 हजार रुपये प्रति किलोग्राम.
- अफीम: 6 हजार रुपये प्रति किलोग्राम.
- हाशिष ऑयल: 10 हजार रुपये प्रति किलोग्राम.
- गांजा: 600 रुपये प्रति किलोग्राम.
सुरक्षा और गोपनीयता के कड़े इंतजाम
- सरकार ने सूचनादाताओं की सुरक्षा का विशेष ख्याल रखा है.
- मुखबिर का असली नाम कहीं दर्ज नहीं होगा. सूचना स्लीप पर उसके बाएं हाथ के अंगूठे का निशान और एक कोड या विशेष हस्ताक्षर लिया जाएगा.
- सूचनादाता का विवरण और बैंक खाता संख्या पूरी तरह सीलबंद करके डीएसपी स्तर के अधिकारी की सेफ वॉल्ट में सुरक्षित रखा जाएगा.
- यदि किसी सरकारी कर्मी की लापरवाही से मुखबिर की गोपनीयता भंग होती है, तो उस कर्मी पर तत्काल कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी और मुखबिर की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित जिले के एसपी की होगी.
20 लाख तक का अनुग्रह अनुदान
- मुखबिर से एक स्वघोषणा भी ली जाएगी. यदि कोई व्यक्ति किसी को परेशान करने की दुर्भावना से झूठी सूचना देता है, तो भारतीय न्याय संहिता-2023 की धारा-217 के तहत उसके खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा.
- तस्करों के खिलाफ सूचना देने वाले नागरिकों के साहस को सलाम करते हुए सरकार ने उनके लिए एक सुरक्षा कवच भी तैयार किया है. यदि सफल जप्ती के बाद तस्कर या उनका गिरोह मुखबिर पर हमला करता है, तो सरकार एकमुश्त वित्तीय सहायता देगी.
- मृत्यु होने की स्थिति में आश्रितों को 20 लाख.
- 100% स्थाई दिव्यांगता पर 10 लाख.
- 40% या अधिक दिव्यांगता पर 5 लाख.
- गंभीर रूप से घायल होने पर 3 लाख.
- सामान्य रूप से घायल होने पर 50 हजार.
- इसके लिए बकायदा पुलिस केस दर्ज होना चाहिए और जांच में यह साबित होना चाहिए कि हमला ड्रग्स की सूचना देने के कारण ही हुआ है.


