Tuesday, July 21, 2026

NEET छात्रा मौत मामला: नर्स की कॉल से बढ़ा विवाद, सांसद पप्पू यादव ने उठाए कई गंभीर सवाल

पटना: बिहार में NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब और ज्यादा संवेदनशील और चर्चित हो गया है। पूर्णिया सांसद पप्पू यादव के फोन पर आई एक नर्स की कॉल ने इस केस को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रा की हालत, इलाज की प्रक्रिया और जांच में देरी को लेकर अब सिस्टम पर सवाल उठने लगे हैं।

क्या है पूरा मामला

यह मामला बिहार की राजधानी पटना से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। छात्रा बाद में इलाज के दौरान मौत का शिकार हो गई। इस घटना के बाद छात्रा के परिवार और कई सामाजिक-राजनीतिक संगठनों ने न्याय की मांग उठाई है। मामला तब और गरमा गया जब सांसद पप्पू यादव ने एक नर्स से हुई बातचीत का हवाला देते हुए कई चौंकाने वाले दावे किए। इस घटना ने प्रशासन, अस्पताल व्यवस्था और जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

नर्स की कॉल में क्या दावे किए गए

नर्स ने कथित तौर पर बताया कि जब छात्रा को अस्पताल लाया गया, तब वह पूरी तरह बेहोश थी। उसकी हालत देखकर मेडिकल स्टाफ को शुरू में ही आशंका हो गई थी कि उसके साथ कुछ गंभीर गलत हुआ है। नर्स के मुताबिक छात्रा को इमरजेंसी में भर्ती कर वेंटिलेटर पर रखा गया। दो दिन तक छात्रा को होश नहीं आया। तीसरे दिन थोड़ी चेतना आने पर वह बोल नहीं पा रही थी, लेकिन इशारों में बात कर रही थी। वह डरी हुई थी और लगातार रो रही थी। नर्स का दावा है कि छात्रा के शरीर और प्राइवेट पार्ट से जुड़े कुछ संकेत ऐसे थे, जिससे यौन शोषण की आशंका जताई जा रही थी।

इलाज और इंजेक्शन को लेकर सवाल

नर्स ने यह भी दावा किया कि अस्पताल में रात में मरीजों को नींद का इंजेक्शन दिया जाता है, लेकिन छात्रा को कौन सा इंजेक्शन दिया गया और क्यों दिया गया, इसकी जानकारी नर्सिंग स्टाफ को नहीं दी गई। इसके बाद छात्रा की हालत बिगड़ती चली गई और वह कोमा में चली गई। इसी को लेकर अब मेडिकल लापरवाही और तथ्यों को छिपाने जैसे सवाल उठ रहे हैं। पप्पू यादव ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं अगर अस्पताल स्टाफ को पहले दिन ही गलत होने का शक था, तो पुलिस को तुरंत सूचना क्यों नहीं दी गई?

FIR दर्ज करने में देरी क्यों हुई?

DNA सैंपल लेने के बाद भी आरोपी की पहचान क्यों नहीं हो पाई? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया जा रहा है। पप्पू यादव ने इस मामले में CBI जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक सच सामने नहीं आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बेटियों की सुरक्षा सबसे जरूरी है और अगर सुरक्षा नहीं होगी तो सरकारी योजनाओं का कोई मतलब नहीं रहेगा।

सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया

मामले को लेकर बिहार सरकार पर भी दबाव बढ़ा है। सरकार की ओर से कहा गया है कि जांच के लिए SIT बनाई गई है और हर एंगल से जांच की जा रही है। बिहार के डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर न्याय दिलाने का भरोसा दिया है और कहा है कि दोषी कोई भी हो, उसे सख्त सजा दी जाएगी। मामले में SIT और अन्य जांच एजेंसियां जांच कर रही हैं। लेकिन अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि छात्रा के साथ क्या हुआ और जिम्मेदार कौन है। इसी वजह से यह मामला लगातार राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

सिस्टम पर उठ रहे बड़े सवाल

यह मामला सिर्फ एक छात्रा की मौत का नहीं, बल्कि कई बड़े सवालों का भी है: क्या अस्पताल में सही इलाज हुआ? क्या घटना को दबाने की कोशिश हुई? क्या जांच में देरी हुई? इन्हीं सवालों के जवाब अब पूरे राज्य को चाहिए। NEET छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। नर्स की कॉल और सांसद के आरोपों ने जांच को और गंभीर बना दिया है। अब सभी की नजर जांच एजेंसियों और सरकार पर है कि सच कब और कैसे सामने आता है। जब तक इस मामले की पूरी सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक यह सवाल बना रहेगा कि आखिर उस छात्रा के साथ क्या हुआ और उसकी मौत के लिए जिम्मेदार कौन है।

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एयर नाऊ स्पेशल

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