दिल्ली : दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नकली और पायरेटेड एनसीईआरटी किताबें छापने और बेचने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने कुल 44,862 नकली एनसीईआरटी किताबें बरामद की हैं, जो अलग-अलग कक्षाओं और विषयों की थीं। यह मामला शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण काफी गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि इससे छात्रों के भविष्य पर गलत असर पड़ सकता था।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गाजियाबाद के लोनी इलाके में एक अवैध प्रिंटिंग फैक्ट्री चलाई जा रही थी। इसी फैक्ट्री में आधुनिक मशीनों की मदद से बिल्कुल असली जैसी दिखने वाली एनसीआरटी किताबें छापी जा रही थीं। इसके बाद इन्हें दिल्ली और एनसीआर के विभिन्न इलाकों में किताब विक्रेताओं और बाजारों में भेजा जाता था।
छापेमारी में पुलिस ने दो बड़ी ऑफसेट प्रिंटिंग मशीनें, भारी मात्रा में कागज की रील, प्रिंटिंग इंक और एल्यूमिनियम प्लेटें भी जब्त की हैं। अधिकारियों के अनुसार, जब्त सामान की कुल कीमत लगभग दो करोड़ रुपये बताई जा रही है। इससे साफ है कि यह कोई छोटा-मोटा काम नहीं था, बल्कि सुनियोजित और बड़े स्तर पर चलाया जा रहा अवैध कारोबार था।
इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिसमें सुमित, विनोद जैन और कनिष्क शामिल हैं। शुरुआती पूछताछ में सामने आया कि ये लोग काफी समय से इस धंधे में शामिल थे और नए शैक्षणिक सत्र से पहले बड़ी मात्रा में नकली किताबें बाजार में बेचने की तैयारी कर रहे थे।
क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के खिलाफ कॉपीराइट कानून के उल्लंघन सहित कई धाराओं में मामला दर्ज किया। फिलहाल उनसे पूछताछ जारी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये नकली किताबें किन-किन इलाकों में सप्लाई की गईं और इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।


