न्यूज डेस्क : महाराष्ट्र के नासिक में स्थित टीसीएस कंपनी में आठ महिला कर्मियों के यौन शोषण और मानसिक प्रताड़ना के आरोप इस मामले में टीसीएस ने भी आधिकारिक बयान जारी किया है. टीसीएस के सीईओ और एमडी के. कृतिवासन ने बयान में कहा, “अभी विस्तृत समीक्षा जारी है, लेकिन शुरुआती जांच से पता चला है कि नासिक यूनिट से जुड़े सिस्टम और रिकॉर्ड्स में हमें ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है, जैसी आरोपों में कही जा रही है. न ही हमारे एथिक्स चैनल पर और न ही पोश चैनल पर.”
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ओवरसाइट कमेटी कर रही आंतरिक जांच
उन्होंने बताया, “हमने डेलॉइट और बड़ी लॉ फर्म ट्राइलीगल की विशेषज्ञ टीमों को जोड़ा है. ये टीमें स्वतंत्र सलाहकार के तौर पर काम कर रही हैं और आंतरिक जांच का नेतृत्व टीसीएस की प्रेसिडेंट और सीओओ आरती सुब्रमणयन कर रही हैं.” कृतिवासन ने कहा, “हमने एक ओवरसाइट कमेटी बनाई है. आंतरिक जांच में जो चीज़ें सामने आएंगी, वो ओवरसाइट कमेटी को दी जाएंगी. ताकि वे समीक्षा कर सकें और ज़रूरी सुझाव लागू किए जा सकें.”
कंपनी के एमडी ने कहा, “हम क़ानूनी प्रवर्तन एजेंसियों के साथ पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं ताकि यह मामला गहराई से और पारदर्शिता के साथ जांचा जाए और सही निष्कर्ष तक पहुंचे.” टीसीएस की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि नासिक फैसिलिटी को बंद नहीं किया है, यह अभी भी चल रही है.
क्या है मामला, क्या लगे आरोप
बता दें कि अब तक इस मामले में कुल 9 एफ़आईआर दर्ज हुई हैं. अभियुक्तों में टीसीएस के कर्मचारी, एचआर विभाग के कुछ लोग और डिलीवरी पार्टनर्स शामिल हैं. यहां काम करने महिलाओं ने यौन शोषण, शादी का झांसा देकर संबंध बनाने, धोखाधड़ी और धार्मिक भावनाएं आहत करने जैसे आरोप लगाए हैं. इस मामले में एक महिला समेत कुल 7 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है, जबकि एक महिला अभियुक्त फ़रार बताई जा रही हैं.


