Wednesday, July 22, 2026

झारखंड और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के बीच JJM 2.0 पर MOU, जल सहियाओं के मानदेय के लिए केंद्र से मांगी मदद

रांची : जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के तहत झारखंड सरकार और भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के बीच MOU पर हस्ताक्षर किए गए। नई दिल्ली में आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी०आर० पाटिल ने की। इस समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर समारोह में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन झारखंड मंत्रालय से ऑनलाइन माध्यम से सम्मिलित हुए।

समारोह का शुभारम्भ केंद्रीय मंत्री सी० आर० पाटिल एवं झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद के बीच अभिवादन आदान-प्रदान से हुई। समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री जल शक्ति मंत्रालय वी० सोमन्ना, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री, झारखंड योगेंद्र प्रसाद, सचिव, जल शक्ति मंत्रालय, प्रबंध निदेशक, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (NJJM), केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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हर घर नल से जल पहुंचाने का संकल्प

समझौता हस्ताक्षर समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि आज जल जीवन मिशन के इस महत्वकांक्षी योजना के तहत राज्य एवं केंद्र सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू हुआ है। इस कार्यक्रम में हमसभी लोग वर्चुअल माध्यम से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एमओयू आने वाले समय में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार वर्ष, 2019 से जल जीवन मिशन योजना के तहत हर घर नल से जल पहुंचाने के लक्ष्य के साथ संकल्पित होकर आगे बढ़ रहा है।

मिशन मोड में जल जीवन मिशन

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड सरकार भी इस बात से सहमत है कि मिशन मोड में जल जीवन मिशन योजना का लाभ झारखंड के प्रत्येक घरों तक पहुंचाई जाए, राज्य सरकार इस निमित्त केंद्र सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर कार्यों को गति देने को लेकर निरंतर प्रयासरत है।

उन्होंने कहा कि हर घर नल से जल पहुंचाने के संकल्प को पूरा करने में हम निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। यह बात सही है कि इस योजना के सफल संचालन के लिए झारखंड की भौगोलिक संरचना बहुत अनुकूल नहीं है। झारखंड प्रदेश की ग्रामीण संरचना वन क्षेत्रों में स्थापित है। सरकारी कार्यालय सहित एनएचआई, डीवीसी के कार्यों के साथ-साथ अन्य जलस्रोत स्पॉट पर जल सप्लाई का कार्य होता है, यही कारण है कि इस कार्य के लिए कभी-कभी एनओसी की समस्या होती है।

मानदेय हेतु केंद्र से वित्तीय सहायता

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार के साझा प्रयास से एनओसी से जुड़ी समस्याओं का समाधान निकला जा सकता है, एनओसी की समस्या का त्वरित समाधान से कार्य योजना को ससमय पूर्ण किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने लगभग 30 हजार जल सहियाओं की नियुक्ति की है।

जल सहिया दीदियों द्वारा पेयजल व्यवस्था को संचालित किया जा रहा है। राज्य सरकार जल सहियाओं को प्रति माह दो हजार रुपए मानदेय देती है। मुख्यमंत्री ने जल सहियाओं के मानदेय हेतु केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता दिए जाने का आग्रह किया तथा जल जीवन मिशन योजना में जल सहिया कंपोनेंट को जोड़ने का भी आग्रह किया।

मुख्यमंत्री के उठाए प्रमुख मुद्दे:-

▪️वर्ष 2019-20 से जल जीवन मिशन के अंतर्गत राज्य में कुल ₹24,635 करोड़ की लागत वाली पेयजल योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

▪️मल्टी विलेज स्कीम (MVS) और सिंगल विलेज स्कीम (SVS) पर विशेष जोर दिया गया।

▪️ मुख्यमंत्री ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री को अवगत कराया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में अब तक केंद्र से कोई पर्याप्त धनराशि जारी नहीं की गई है। अतएव स्वीकार्य केंद्रांश राशि शीघ्र जारी करने का आग्रह किया गया।

▪️ मुख्यमंत्री ने जानकारी से अवगत कराया कि अभी तक 55% परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, जबकि पूर्ण कार्यों के लिए केंद्र सरकार द्वारा केवल 46% अनुदान ही उपलब्ध कराया गया है। केंद्र सरकार से लगभग ₹6,500 करोड़ राशि की लंबित सहायता मांगी गई।

▪️ मुख्यमंत्री द्वारा योजनाओं को निर्धारित समयसीमा के अंतर्गत पूरा करने के लिए केंद्र सरकार की संस्थाओं से NOC देने में समय पर सहयोग की आवश्यकता देने पर बल दिया गया।

▪️राज्य स्तर पर सिंगल विलेज स्कीम (SVS) के सतत संचालन पर बल दिया गया। सरकार ने प्रत्येक गांव में जल सहिया तैनात की है और उन्हें ₹2,500 प्रतिमाह की सहायता प्रदान की जा रही है। इस हेतु केंद्र सरकार से समुचित सहयोग की अपेक्षा की गई।

▪️भविष्य की सभी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) में सभी घटकों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

अन्य महत्वपूर्ण निर्णय:-

• झारखंड के लिए विशेष रूप से ₹2,500 करोड़ की राशि आवंटित की गई है। राज्य को JJM 2.0 के मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा और दिशा-निर्देशों के अनुसार धनराशि जारी कराने का अनुरोध किया गया।

• जिलाधिकारियों (DM/DC) को JJM परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सक्रिय निगरानी और भागीदारी करने के निर्देश दिए गए।

• ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाली योजनाओं की उच्चतम स्तर पर सख्त समीक्षा की जाएगी।

• झारखंड JJM के प्रबंध निदेशक पद को संयुक्त सचिव रैंक के अधिकारी द्वारा संभालने की सिफारिश की गई।

• समारोह में ₹1,400 करोड़ की अनुचित (inadmissible) लागत वाले ओवरसाइज्ड घटक की भी समीक्षा करने के निर्देश दिए गए।

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एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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