Wednesday, July 22, 2026

ईरान में 5000 से ज़्यादा लोगों कि मौत? ट्रम्प ने कहा,”खामेनेई ने अपने ही देश को बर्बाद किया ”

एयरनाउ डेस्क: ईरान में आखिर हुआ क्या है? क्या वाकई सड़कों पर उतरे हज़ारों लोग मारे गए? अगर ऐसा है, तो इतने दिनों तक दुनिया को सच्चाई क्यों नहीं बताई गई? और सबसे बड़ा सवाल—क्या खुद ईरान के सर्वोच्च नेता ने पहली बार यह मान लिया है कि उनके देश में हजारों लोगों की जान गई? क्या यह सिर्फ महंगाई और बेरोज़गारी के खिलाफ गुस्से का नतीजा था, या इसके पीछे किसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय साज़िश की भूमिका है? और जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुलेआम ईरान के लोगों से सत्ता के खिलाफ खड़े होने की अपील कर रहे थे, तब ईरान के हालात आखिर कितने खतरनाक हो चुके थे?
ईरान, जो पिछले कई हफ्तों से पूरी दुनिया की नज़रों में बना हुआ है। वजह सिर्फ विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि उन प्रदर्शनों के दौरान हुई हजारों मौतें, सरकार की चुप्पी और अब खुद देश के सर्वोच्च नेता का वह बयान, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया है कि हाल के देशव्यापी प्रदर्शनों में “हजारों लोग” मारे गए हैं। यह स्वीकारोक्ति ऐसे समय पर सामने आई है, जब पूरी दुनिया ईरान में हो रही सख़्त कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रही है।
दरअसल, इन प्रदर्शनों की शुरुआत दिसंबर के आख़िरी हफ्ते में हुई थी। शुरुआत महंगाई, बेरोज़गारी और आम लोगों की ज़िंदगी में बढ़ती परेशानियों से हुई। रोज़मर्रा की चीज़ें आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही थीं, नौकरियां कम होती जा रही थीं और गुस्सा लगातार बढ़ रहा था। लेकिन धीरे-धीरे यह गुस्सा सिर्फ आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा। लोगों ने सरकार, धार्मिक नेतृत्व और पूरे सिस्टम पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग सड़कों पर उतर आए। कई जगहों पर हालात इतने बिगड़े कि सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच सीधी झड़पें होने लगीं। रॉयटर्स से बात करते हुए एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर दावा किया कि इन प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 5,000 लोगों की मौत हुई है। इनमें करीब 500 सुरक्षा बलों के जवान भी शामिल बताए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा हिंसा ईरान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में देखने को मिली, खासकर कुर्द बहुल इलाकों में, जहां पहले से ही तनाव बना रहता है।
हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि हालात बेहद गंभीर थे। कई संगठनों के मुताबिक, कम से कम 3,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। असली आंकड़े आज भी साफ नहीं हैं, क्योंकि जैसे ही हालात बिगड़े, ईरानी सरकार ने देशभर में इंटरनेट सेवाएं लगभग पूरी तरह बंद कर दी थीं। इंटरनेट बंद होने की वजह से न तो सही जानकारी बाहर आ पाई और न ही मौतों की सही गिनती हो सकी।
इसी बीच, शनिवार को देश को संबोधित करते हुए सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि हालिया अशांति में “कई हज़ार लोगों” की जान गई है। यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि ईरान की सत्ता आमतौर पर इस तरह की बातों को स्वीकार नहीं करती। हालांकि खामेनेई ने मौतों की ज़िम्मेदारी सीधे तौर पर ईरान की सुरक्षा एजेंसियों पर नहीं डाली। उन्होंने कहा कि कुछ लोग “अमानवीय और बर्बर हालात” के चलते मारे गए, लेकिन इसके लिए उन्होंने अमेरिका और अन्य विदेशी ताकतों को ज़िम्मेदार ठहराया।
अपने भाषण में खामेनेई ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ये प्रदर्शन ईरान की जनता की नाराज़गी नहीं, बल्कि बाहर से रची गई एक साज़िश का हिस्सा हैं। उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप लगाया कि ट्रंप ने सोशल मीडिया और बयानों के ज़रिये इन प्रदर्शनों को उकसाया। खामेनेई ने ट्रंप को “अपराधी” बताया और कहा कि अमेरिका ईरान को कमजोर करना चाहता है और देश को “निगलने” की कोशिश कर रहा है।
दूसरी तरफ, डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान के नेतृत्व के खिलाफ अपने बयान और सख़्त कर दिए। उन्होंने कहा कि ईरान को अब नए नेतृत्व की ज़रूरत है। ट्रंप ने खामेनेई के 37 साल के शासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह शासन डर और हिंसा पर टिका हुआ है। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि खामेनेई ने अपने ही देश को तबाही की ओर धकेल दिया है और वह देश चलाने के लायक नहीं हैं।
ट्रंप ने यह भी कहा कि एक नेता का काम लोगों में डर पैदा करना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मान और सुरक्षा देना होता है। उन्होंने यहां तक कहा कि खामेनेई एक “बीमार आदमी” हैं, जो अपने देश को सही ढंग से चलाने में नाकाम रहे हैं। इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान के लोगों से प्रदर्शन जारी रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोग संस्थानों पर कब्ज़ा करें और बदलाव के लिए आगे आएं। उन्होंने यह भी कहा कि “मदद रास्ते में है,” जिससे हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए।
इन बयानों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बढ़ गई। कई देशों को डर है कि अगर ईरान में हालात और बिगड़े, तो यह संकट सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। इसी बीच, ईरान सरकार लगातार इस पूरे आंदोलन को “अमेरिकी साज़िश” बता रही है। खामेनेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी लिखा कि हालिया अशांति की पूरी योजना अमेरिका ने बनाई थी और उसका मकसद ईरान की संप्रभुता को खत्म करना है।
ईरान ने सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि इज़रायल पर भी आरोप लगाए हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत के दौरान कहा कि अमेरिका और इज़रायल ईरान के आंतरिक मामलों में दखल दे रहे हैं और हालात बिगाड़ रहे हैं।
अब ईरान में हालात एक अजीब सी शांति की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। राजधानी तेहरान में पिछले कुछ दिनों से कोई बड़ा प्रदर्शन नहीं हुआ है। दुकानें फिर से खुल गई हैं और सड़कें धीरे-धीरे सामान्य होती दिख रही हैं। सरकारी मीडिया का दावा है कि हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं।
प्रदर्शनों के दौरान 8 जनवरी को देशभर में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी गई थीं। इससे आम लोगों से लेकर व्यापार और बैंकिंग सिस्टम तक सब कुछ ठप हो गया था। अब कुछ इलाकों में सीमित इंटरनेट सेवाएं बहाल की गई हैं। लोगों का कहना है कि मोबाइल मैसेजिंग फिर से काम करने लगी है। कुछ यूज़र्स को घरेलू वेबसाइट्स तक पहुंच मिली है और कुछ ने वीपीएन के ज़रिये अंतरराष्ट्रीय साइट्स खोलने की बात भी कही है।
इंटरनेट ट्रैफिक पर नज़र रखने वाली संस्थाओं के मुताबिक, कनेक्टिविटी में मामूली सुधार देखा गया है। सरकारी एजेंसियों ने भी सीमित इंटरनेट बहाली की पुष्टि की है, लेकिन इसके पीछे की वजह साफ नहीं की गई है। माना जा रहा है कि लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहने से व्यापार और बैंकिंग पर पड़ रहे दबाव के चलते सरकार ने यह कदम उठाया है।
फिलहाल ईरान एक बेहद नाज़ुक दौर से गुजर रहा है। एक तरफ सत्ता है, जो इसे विदेशी साज़िश बता रही है, और दूसरी तरफ वो हज़ारों परिवार हैं, जिन्होंने अपने अपनों को खो दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह शांति टिक पाएगी, या फिर ईरान की सड़कों पर दबा हुआ गुस्सा एक बार फिर फूट पड़ेगा।

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एयर नाऊ स्पेशल

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