झारखंड : झारखंड के बड़े सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए परेशानी बढ़ने वाली है। राज्य सरकार और निजी कंपनी हेल्थ मैप डायग्नोस्टिक के बीच करार खत्म होने के बाद कई मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में सस्ती रेडियोलॉजी जांच सेवा बंद होने जा रही है। ऐसे में अब मरीजों को महंगे निजी जांच केंद्रों का सहारा लेना पड़ेगा, जिसका सीधा असर गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ेगा।
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किन अस्पतालों में पड़ेगा असर
राज्य के तीन बड़े मेडिकल कॉलेज रिम्स, एसएनएमएमसीएच और एमजीएम में अब रेडियोलॉजी जांच महंगी हो जाएगी। इसके अलावा देवघर, खूंटी, गिरिडीह, जामताड़ा, गोड्डा, साहिबगंज, सरायकेला और पाकुड़ के सदर अस्पतालों में भी इसका असर दिखेगा। पीपीपी मोड पर रेडियोलॉजी सेवा दे रही हेल्थ मैप डायग्नोस्टिक प्रा. लि. का राज्य सरकार के साथ एमओयू खत्म हो चुका है। वैकल्पिक व्यवस्था होने तक कंपनी को 31 दिसंबर तक अस्थायी अवधि विस्तार दिया गया था। अब इसके बाद सेवा बंद करने का नोटिस जारी कर दिया गया है।
रिम्स में सबसे ज्यादा असर
रिम्स में हेल्थ मैप के जरिए एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांच होती है। सरकारी एमओयू के तहत ये जांचें सीजीएचएस की दरों पर होती थीं, जो निजी केंद्रों से 40 से 50 प्रतिशत तक सस्ती थीं। रिम्स में रोजाना 60 से अधिक मरीजों की सीटी स्कैन और एमआरआई जांच होती है, जिनमें ट्रॉमा, ब्रेन स्ट्रोक, एक्सीडेंट और इमरजेंसी केस शामिल रहते हैं। सेवा बंद होने से इन मरीजों को भारी खर्च उठाना पड़ेगा।
गरीब मरीजों पर पड़ेगा सीधा असर
हेल्थ मैप की सेवा बंद होने से बीपीएल और जेएसएसके मरीजों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। पहले जहां इन मरीजों को मुफ्त या कम दर पर जांच की सुविधा मिलती थी, अब उन्हें निजी जांच केंद्रों में अधिक पैसे चुकाने होंगे। पहले भी भुगतान अटकने के कारण मुफ्त जांच सेवा प्रभावित हो चुकी है।
10 साल में 113 करोड़ से ज्यादा का भुगतान
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में हेल्थ मैप को जांच सेवाओं के बदले 113 करोड़ 74 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया गया। इसमें एपीएल मरीजों से 69.86 करोड़ रुपये और बीपीएल व जेएसएसके मरीजों की जांच के बदले सरकार द्वारा 43.87 करोड़ रुपये का भुगतान शामिल है।
कंसेशन फीस न देने का आरोप
झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने हेल्थ मैप पर कंसेशन फीस नहीं देने का गंभीर आरोप लगाया है। निगम के अनुसार, 16 नवंबर 2015 को 10 वर्षों के लिए एमओयू हुआ था, जिसकी अवधि 15 नवंबर 2025 को पूरी हो चुकी है। नियमों के अनुसार कंपनी को हर साल प्रीमियम कंसेशन फीस जमा करनी थी, लेकिन 10 साल में सिर्फ 11.37 लाख रुपये ही जमा किए गए।
4 करोड़ से ज्यादा बकाया
राज्यभर में हेल्थ मैप पर 4 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। केवल रिम्स में ही करीब ढाई करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा बिलों का सत्यापन पूरा हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद भुगतान नहीं हो पाया है।हालांकि हेल्थ मैप की सेवा को आगे बढ़ाने को लेकर चर्चा चल रही है, लेकिन फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। जब तक नई व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक मरीजों को निजी जांच केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ेगा।


