Saturday, October 31, 2026

झारखंड में बेकाबू हाथियों को फंसाने के लिए कर्नाटक से बुलाए गए कुनकी हाथी, अब तक 35 मौत

रांची : राज्य में हाथियों के खौफ में दिन और रात बिता रहे चाईबासा और हजारीबाग के लोगों की मदद करने कर्नाटक से छह कुनकी हाथी आ रहे हैं। विशेष तौर पर प्रशिक्षित ये हाथी झारखंड के बेलगाम हाथियों को अपनी अदाओं से फंसाएंगे और उन्हें वापस जंगल ले जाएंगे। व्यस्क नर हाथियों में टेस्टेस्टेरान हार्मोन बढ़ जाने से वो बेलगाम हो जाते हैं।

ऐसे बौराए हाथियों की वजह से महीने भर में 25 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। चाईबासा में अकेले हाथी ने 15 से अधिक लोगों की जान ले ली है। हजारीबाग में पांच हाथियों का समूह सात लोगों की एक ही रात में जान ले चुका है। अब ये कुनकी हाथी इन बौराए हाथियों को अपने प्रेमजाल में लाकर शांत करेंगे और लोगों की जान बचांगे।

क्या होता है कुनकी हाथी

कर्नाटक वन विभाग ने हाथियों को प्रशिक्षित करने और उनके साथ महावत रखने का प्रयोग किया है। इन्हें कुनकी हाथी कहा जाता है। कुनकी या कुमकी फारसी भाषा का शब्द है जसका अर्थ होता है सहायक। हाथियों को प्रशिक्षित और अनुशासित बनाकर उन्हें बिगड़ैल हाथियों पर नियंत्रण करने भेजा जाता है। तमिलनाडू में कालेम और कर्नाटक का अभिमन्यु नामक कुनकी हाथी कई सफल अभियान में सहायक रहा है। हाथियों के शरीर से निकलने वाली गंध और आपसी व्यवहार के ये बेलगाम हाथियों पर नियंत्रण करते हैं।

क्यों हिंसक हो रहे हाथी

झारखंड में करीब 600 हाथी रहते हैं। ये जंगलों में विचरण करते रहते हैं। लेकिन वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में जंगल छोटे हुए हैं। इस वजह से हाथियों को पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं मिल पा रहा है। सामान्य तौर पर एक हाथी की भोजन आवश्यकता दिन में 17 घंटे खाने से होती है।

लेकिन जंगल में संसाधन कम हुए हैं और हाथी आबादी वाले इलाके में प्रवेश कर रहे हैं। यहां खेतों में तैयार फसल, केला जैसे तैयार फल इन्हें खाने को मिल रहा है। इससे इनकी भोजन आवश्यकता पूरी हो जा रही है। लेकिन क्षेत्र को लेकर आपसी प्रतिस्पर्धा बढ़ती है। इस वजह से किसी नर हाथी को झुंड छोड़ना पड़ता है और वह हिंसक हो जाता है।

वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने छह कुनकी हाथियों को देने की सहमति दे दी है। जल्द ही ये हाथी झारखंड आ जाएंगे। इनके साथ प्रशिक्षित महावत और ट्रैंक्युलाइज करने वाली टीम भी होगी। जो हाथी चाईबासा और हजारीबाग में हिंसक हुए हैं उनपर कुनकी हाथियों की मदद से नियंत्रण पा लिया जाएगा। कुनकी हाथियों का प्रयोग दूसरे राज्यों में भी ऐसी स्थिति में हुआ है जो सफल रहा है।

एयर नाऊ स्पेशल

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