जमशेदपुर : लौहनगरी जमशेदपुर के लिए मंगलवार की सुबह बड़ी की खबर सामने आई लेकर है। पिछले 14 दिनों से अपहरणकर्ताओं के चंगुल में फंसे युवा उद्योगपति कैरव गांधी (24 वर्ष) को पुलिस ने सकुशल मुक्त करा लिया है। मंगलवार तड़के करीब 4:30 बजे पुलिस की विशेष टीम उन्हें सर्किट हाउस एरिया स्थित उनके आवास पर सुरक्षित लेकर पहुंची। इधर कैरव की घर वापसी के दौरान पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहे।
13 जनवरी को हुआ था अपहरण
घटना की शुरुआत 13 जनवरी की सुबह हुई थी। कैरव गांधी करीब 11:30 बजे अपने घर से बिष्टुपुर स्थित एसबीआई बैंक जाने और फिर आदित्यपुर स्थित अपनी फैक्ट्री के लिए निकले थे। लेकिन दोपहर तक न तो वे फैक्ट्री पहुंचे और न ही घर लौटे। परिजनों ने जब संपर्क करने की कोशिश की तो उनका मोबाइल फोन बंद मिला। उसी शाम पुलिस को उनकी कार चांडिल थाना क्षेत्र के कांदरबेड़ा में एनएच-33 किनारे लावारिस हालत में मिली। कार की चाबी इग्निशन में ही लगी थी और मोबाइल फोन पास ही जमीन पर पड़ा हुआ था।
विदेशी नंबर से मांगी गई थी 5 करोड़ की फिरौती
जांच के दौरान खुलासा हुआ कि अपहरणकर्ताओं ने कैरव के पिता देवांग गांधी से व्हाट्सएप कॉल के जरिए 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। कॉल इंडोनेशिया के कोड (+62) वाले नंबर से की गई थी। अपहरणकर्ताओं ने पुलिस को सूचना देने पर गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी भी दी थी।
पुलिस की 7 टीमों ने की दिन-रात मेहनत
इस हाई-प्रोफाइल केस को सुलझाने के लिए जमशेदपुर पुलिस ने 7 विशेष जांच दल गठित किए। एसएसपी और डीजीपी के निर्देश पर जांच का दायरा झारखंड से बाहर बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा तक फैलाया गया। इस दौरान हनी ट्रैप का एंगल भी सामने आया। सीसीटीवी फुटेज में एक सफेद स्कॉर्पियो कार नजर आई, जिस पर ‘पुलिस’ का स्टीकर लगा था। इसके अलावा बिहार के वैशाली से एक संदिग्ध हैचबैक कार भी बरामद की गई, जिसका इस्तेमाल रेकी के लिए किया गया था।
भाजपा नेताओं और विधायक सरयू राय ने पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाया। माना जा रहा है कि लगातार छापेमारी और पुलिस दबाव के चलते अपहरणकर्ताओं ने कैरव को छोड़ दिया। हालांकि, पुलिस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि गिरफ्तारी कहां से हुई और फिरौती दी गई या नहीं। जल्द ही पुलिस इस मामले में विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकती है।


