न्यूज डेस्क : आज यानी बुधवार को सुबह करीब 8 बजे परंपरा के अनुसार केदारनाथ मंदिर के कपाट खोले गए। सबसे पहले मंदिर का पूर्व द्वार खोला गया, जिसके बाद मुख्य पुजारी, रावल और हक-हकूकधारियों ने अंदर प्रवेश कर पूजा-अर्चना की। कपाट खुलने के दौरान पिछले साल कपाट बंद करते समय ज्योतिर्लिंग पर चढ़ाई गई भस्म को हटाया गया। इस भस्म को श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया गया, जिसे बहुत पवित्र माना जाता है।
Highlights:
मुख्यमंत्री ने कराई पहली पूजा
कपाट खुलने के मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी धाम पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से पहली पूजा कराई। वैदिक विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न होने के बाद मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। इस बार यात्रा के दौरान नियमों को लेकर सख्ती बढ़ाई गई है। मंदिर समिति के अनुसार मंदिर परिसर से 50 से 60 मीटर के दायरे में मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं है। फोटोग्राफी के लिए अलग स्थान तय किए गए हैं। मुख्य मंदिर परिसर में फोटो, वीडियो और रील बनाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
Air Now के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें:-
भैरवनाथ मंदिर का महत्व
परंपरा के अनुसार कपाट खुलने के पहले दिन भगवान केदारनाथ को भोग नहीं लगाया जाता। भोग की शुरुआत तब होती है जब भैरवनाथ मंदिर के कपाट खुलते हैं। इस बार भैरवनाथ मंदिर 25 अप्रैल को खुलेगा, जिसके बाद नियमित भोग शुरू किया जाएगा। मान्यता है कि भैरवनाथ मंदिर केदारनाथ धाम का रक्षक है। यह मंदिर मुख्य धाम से करीब 500 मीटर दक्षिण में स्थित है। श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन से पहले भैरवनाथ के दर्शन करते हैं, तभी यात्रा को पूर्ण माना जाता है। कपाट खुलने के साथ ही केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई है। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि यात्रा सुचारु रूप से चल सके।


