रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने सीबीआई से एमपी-एमएलए के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों को जल्द निष्पादित करने को कहा है। सोमवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह निर्देश मौखिक तौर पर दिया। इस दौरान हाईकोर्ट ने अपनी मौखिक टिप्पणी में कहा कि ट्रायल में देरी होने से गवाहों पर भी असर पड़ता है, उनकी गवाही प्रभावित होती है। सुनवाई के दौरान मामले में राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि उसके पास एमपी /एमएलए से संबंधित दो अपराधिक मामले थे। जिनमें से एक मामला पूर्व मंत्री बंधु तिर्की से जुड़ा है और इस मामले को सीबीआई को ट्रांसफर हो चुका है।
Highlights:
बंधु तिर्की से जुड़े मामले में विजिलेंस स्पेशल केस संख्या 66/ 2010 दर्ज किया गया था. वहीं बीज घोटाला से संबंधित स्पेशल विजिलेंस केस 15/ 2009 में पूर्व विधायक नलिन सोरेन और सत्यानंद भोक्ता के खिलाफ मामला विजिलेंस कोर्ट में चल रहा है। इस मामले में सत्यानंद भोक्ता की ओर से सिविल कोर्ट में डिस्चार्ज पिटीशन दाखिल किया गया था। जो फिलहाल लंबित है। सोमवार को एमपी-एमएलए के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले के त्वरित निष्पादन को लेकर कोर्ट के स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई।
सीबीआई ने मांगा अतिरिक्त समय
मामले में सीबीआई की ओर से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कुछ समय की मांग की गई। कोर्ट ने सीबीआई के आग्रह को स्वीकार करते मामले के अगली सुनवाई 11 फरवरी 2026 निर्धारित की। यहां बता दें कि पिछली सुनवाई में सीबीआई ने कोर्ट को बताया था कि झारखंड में एमपी-एमएलए के 11 लंबित आपराधिक मामले राज्य की विभिन्न अदालतो में चल रहे हैं। पूर्व की सुनवाई में एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को बताया था कि झारखंड में एमपी-एमएलए के कई मामले में आरोप पत्र दायर होने के बाद आरोप गठन में 6 साल लग जाते हैं, जिससे ट्रायल पूरा होने में कई वर्ष लग जाएंगे। सीबीआई की मंशा ही नहीं है कि ट्रायल जल्द पूरा हो।
इसके बाद कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की थी कि सीबीआई जैसी संस्था गवाहों को जल्द लाने में असफल साबित हो रही है, ट्रायल में देरी होने से गवाहों में डर का भी माहौल बना रहता है। एक मामले में सीबीआई ने भी स्वीकार किया है कि ट्रायल में गवाहों को धमकाये जाने की आशंका के मद्देनजर उस गवाह की गवाही करने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का भी सहारा लेना पड़ा है।


