झारखंड : झारखंड को केंद्र सरकार की ओर से एक बड़ी सौगात मिली है। भारत सरकार ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर राज्य में चार नए मेडिकल कॉलेज खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय से झारखंड में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।
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वित्त विभाग की बैठक में मिली स्वीकृति
यह मंजूरी वित्तीय मामलों के विभाग (Department of Economic Affairs – DEA) की बैठक में दी गई। बैठक में झारखंड सरकार की ओर से स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने प्रस्ताव की प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि इन मेडिकल कॉलेजों से राज्य के दूरदराज़ इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत होंगी।
चार जिलों में खुलेंगे नए मेडिकल कॉलेज
नए मेडिकल कॉलेज झारखंड के चार जिलों (खूंटी, जामताड़ा, धनबाद और गिरिडीह) में खोले जाएंगे। खूंटी में 50 एमबीबीएस सीटें होंगी, जबकि जामताड़ा, धनबाद और गिरिडीह में 100-100 सीटें स्वीकृत की गई हैं। इस कदम से राज्य में एमबीबीएस सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
VGF योजना के तहत लागू होगी परियोजना
यह परियोजना केंद्र की Viability Gap Funding (VGF) योजना के तहत लागू होगी। धनबाद की परियोजना Sub-Scheme–1, जबकि खूंटी, जामताड़ा और गिरिडीह की परियोजनाएँ Sub-Scheme–2 के अंतर्गत स्वीकृत की गई हैं।
केंद्र और राज्य मिलकर उठाएंगे खर्च
PPP मॉडल के तहत केंद्र सरकार पूंजीगत व्यय (capital expenditure) में 40% और परिचालन व्यय (operational expenditure) में 25% तक सहायता देगी। वहीं, राज्य सरकार 25% से 40% पूंजीगत खर्च और 15% से 25% परिचालन खर्च वहन करेगी। यह साझेदारी राज्य की चिकित्सा शिक्षा प्रणाली को आर्थिक रूप से भी स्थायित्व प्रदान करेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार में मिलेगा बढ़ावा
इन नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी। साथ ही, मेडिकल शिक्षा का विस्तार होगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह का बयान
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि यह झारखंड के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। PPP मॉडल पर मेडिकल कॉलेज खुलने से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा, ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की पहुंच बढ़ेगी और चिकित्सा शिक्षा का दायरा भी विस्तृत होगा।
झारखंड सरकार का यह कदम राज्य को चिकित्सा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। आने वाले वर्षों में इन कॉलेजों के शुरू होने से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और मेडिकल शिक्षा के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलेगी।


