रांची : झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन सदन में ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) को वापस लेने और मनरेगा को लागू रखने का प्रस्ताव सदन में रखा. इस मौके पर अपने संबोधन में ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि वर्ष 2005 में लागू मनरेगा झारखंड के ग्रामीण गरीबों के लिए जीवन रेखा है। इसने रोजगार, गरीबी उन्मूलन, पलायन रोकने और महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आगे ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित VB-GRAM अधिनियम, 2025 से रोजगार की कानूनी गारंटी कमजोर होने, राज्यों पर 60:40 वित्तीय बोझ बढ़ने, ग्राम सभाओं की शक्तियाँ घटने तथा डिजिटल जटिलताओं से श्रमिकों के वंचित होने की आशंका है। अतः मैं संकल्प प्रस्तावित करता हूँ कि मनरेगा के मांग-आधारित, अधिकार-आधारित ढाँचे को यथावत रखा जाए, केंद्र सरकार पूर्ववत वित्तीय जिम्मेदारी निभाए तथा रोजगार के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 150 दिन की जाए, ताकि झारखंड के लाखों गरीब परिवारों के हित सुरक्षित रह सकें।
उन्होंने कहा कि नए वीबीजीरामजी योजना से अधिकारों के हनन की आशंका है. राज्य में वित्तीय बोझ भी बढ़ेगा. ग्रामसभा की शक्ति भी प्रभावित होगी. इसे तत्काल वापस लाया जाना चाहिए. इस योजना में डिजिटल बाधाएं भी होंगी. इस योजना का नाम मनरेगा ही होना चाहिए. मनरेगा को बनाए रखा जाए. साथ ही मनरेगा में 100 से 150 दिन रोजगार गारंटी का प्रावधान किया जाए. सदन में इस प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित किया गया. अब यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा.


