Wednesday, November 4, 2026

दिल्ली ब्लास्ट केस में जैश-ए-मोहम्मद का कनेक्शन उजागर, व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़

दिल्ली : दिल्ली ब्लास्ट मामले की जांच में एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय आतंकी कनेक्शन सामने आया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस धमाके में पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद सीधे तौर पर शामिल था। पाकिस्तान में बैठे जैश के हैंडलर हंजुल्ला ने गिरफ्तार आरोपी डॉ. मुजम्मिल शकील को करीब 40 बम बनाने के वीडियो भेजे थे। ये वीडियो व्हाट्सऐप और अन्य वर्चुअल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भेजे गए थे।

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, हंजुल्ला को डॉ. मुजम्मिल से मिलवाने का काम जम्मू-कश्मीर के शोपियां निवासी मौलवी इरफान अहमद ने किया था। इरफान ने ही डॉक्टरों के नेटवर्क को जोड़कर एक व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल तैयार किया था। यह मॉड्यूल पढ़े-लिखे युवाओं को आतंकी गतिविधियों में शामिल कर रहा था और दिल्ली धमाका भी इसी साजिश का हिस्सा था।

हंजुल्ला का नाम पहले भी आया सामने

जांच में खुलासा हुआ है कि हंजुल्ला असल में कोड नेम भी हो सकता है। 18 अक्टूबर को नौगाम (जम्मू-कश्मीर) में लगे जैश के पोस्टरों में भी कमांडर हंजुल्ला भैया का नाम था। इससे जांच एजेंसियों को शक हुआ कि वही हैंडलर दिल्ली ब्लास्ट मॉड्यूल को भी ऑपरेट कर रहा था।

NIA की गिरफ्त में डॉक्टर और मौलवी

NIA ने दिल्ली ब्लास्ट केस में अब तक कई गिरफ्तारियां की हैं। जिसमें डॉ. मुजम्मिल गनई, डॉ. शाहीन सईद, डॉ. आदिल अहमद राथर और मौलवी इरफान अहमद यह चारों अलफलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े संस्थानों से संबंध रखते थे। इन्हें पूछताछ के आधार पर हिरासत में लिया गया है। इससे पहले जांच टीम ने फरीदाबाद के धौज गांव में रहने वाले एक टैक्सी ड्राइवर के घर छापेमारी की। यहां से आटा चक्की, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मेटल पिघलाने वाली मशीन सहित कई संदिग्ध सामान बरामद हुए।

यूरिया पीसकर बन रहा था विस्फोटक

जांच एजेंसियों को मिली सबसे चौंकाने वाली जानकारी यह है कि उसी आटा चक्की में डॉ. मुजम्मिल यूरिया पीसकर उसे रिफाइन करता था। फिर उसमें केमिकल मिलाकर विस्फोटक तैयार करता था। जांच में सामने आया कि इस्तेमाल किया गया केमिकल अल फलाह यूनिवर्सिटी की लैब से चोरी किया गया था। मुजम्मिल की निशानदेही पर टैक्सी ड्राइवर को पकड़ा गया। उसने बताया कि मुजम्मिल चक्की उसके घर रख गया था और इसे अपनी बहन का दहेज बताया था। बाद में वह इसे धौज में ले गया।

9 नवंबर को इसी कमरे से पुलिस ने 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट और अन्य विस्फोटक बरामद किए थे। इसके अलावा मुजम्मिल ने फतेहपुरतगा में भी एक कमरा किराए पर ले रखा था जहां यूरिया की बोरियां रखी जाती थीं। 10 नवंबर को इसी कमरे से 2558 किलो संदिग्ध विस्फोटक मिला था

कैसे जुड़ा ड्राइवर मॉड्यूल से?

टैक्सी ड्राइवर ने NIA को बताया कि वह पिछले 20 वर्षों से धौज में बहन के घर रहता है और सैनिक कॉलोनी के एक स्कूल की कैब चलाता है। उसके छोटे बेटे के झुलसने के बाद वह अल फलाह मेडिकल कॉलेज पहुंचा था, जहां डॉ. मुजम्मिल ने उसका इलाज किया। यहीं से दोनों के बीच जान-पहचान बढ़ी और मुजम्मिल ने उसे अपने नेटवर्क में शामिल कर लिया।

व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस मॉड्यूल के हर सदस्य की अलग-अलग रोल था। जैसे डॉ. मुजम्मिल नए लोगों को मॉड्यूल में भर्ती करता था। डॉ. शाहीन सईद लोगो को आर्थिक मदद करता था और ब्रेनवॉश कर के अपने टीम में जोड़ता था। डॉ. उमर नबी (ब्लास्ट में मारा गया) साजिश करता था और योजना तैयार करता था। मुजम्मिल अस्पताल के मरीजों और उनके परिवारों की मदद के बहाने उनके घर जाता और भरोसा जीतकर उन्हें आतंक की राह पर ले जाता था।

इस मॉड्यूल का पहला निशाना धौज गांव की अफसाना के जीजा शोएब बना, जो मुजम्मिल से दवाइयों और इलाज के लिए मदद लेता था। इसी तरह साबिर और बाशिद जैसे लोगों को भी मुजम्मिल ने अपने नेटवर्क में शामिल किया। डॉ. शाहीन को इसके लिए मैडम सर्जन कहा जाता था। वह महिला आतंकी टीम बनाने की कोशिश कर रही थी। उसकी डायरी में कुछ लड़कियों के नाम भी मिले हैं।

पंजाब पुलिस भी जांच में शामिल

ब्लास्ट के बाद पंजाब पुलिस भी जांच का हिस्सा बन गई है। गुरुवार को पंजाब पुलिस की टीम अल फलाह यूनिवर्सिटी पहुंची और छात्रों एवं कर्मचारियों से पूछताछ की। पंजाब पुलिस को उस डॉक्टर के बारे में भी जानकारी जुटानी थी, जिसे पठानकोट से हिरासत में लिया गया है। वह जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग का रहने वाला है और पहले चार साल अल फलाह मेडिकल कॉलेज में काम कर चुका है।

उमर के डीएनए की पुष्टि

धमाके के बाद अस्पताल की मॉर्चरी में मिले तीन बॉडी पार्ट्स में से एक का डीएनए फिदायीन उमर नबी से मैच हो गया है। हालांकि दो अन्य बॉडी पार्ट्स की पहचान नहीं हो पाई है, क्योंकि परिजन सामने नहीं आए। विशेषज्ञों का मानना है कि संभव है कि दोनों हिस्से भी उमर के ही हों, लेकिन डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही पुष्टि संभव होगी। फिलहाल मृतकों की संख्या को लेकर भी सस्पेंस बना हुआ है, हालांकि 11 मृतकों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है।

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यह पूरा मामला इस बात का संकेत है कि आतंकवाद अब केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि पढ़े-लिखे लोगों के नेटवर्क के जरिए देश के भीतर भी फैल रहा है। NIA, दिल्ली पुलिस और पंजाब पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से इस आतंकी मॉड्यूल का बड़ा हिस्सा उजागर हो चुका है, लेकिन अभी भी कई और परतें खुलना बाकी हैं।

एयर नाऊ स्पेशल

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