Thursday, July 23, 2026

ISRO का सैटेलाइट मिशन PSLV-C62 सफल उड़ान के बाद तीसरे चरण में हुई गड़बड़ी, जांच शुरू

श्रीहरिकोटा : साल 2026 की शुरुआत में भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम को बड़ा झटका लगा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का पहला सैटेलाइट मिशन PSLV-C62 सफल नहीं हो सका। लॉन्च के कुछ ही मिनटों बाद रॉकेट में तकनीकी गड़बड़ी आ गई, जिससे तय कक्षा में सैटेलाइट स्थापित नहीं हो पाए। यह सैटेलाइट मिशन सोमवार सुबह 10 बजकर 18 मिनट पर लॉन्च किया गया। लॉन्चिंग आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित इसरो के सतीश धवन स्पेस सेंटर से की गई थी।

ISRO ने इस मिशन के लिए अपने भरोसेमंद रॉकेट Polar Satellite Launch Vehicle (PSLV)-C62 का इस्तेमाल किया। यह PSLV रॉकेट की कुल 64वीं उड़ान रही। PSLV को दुनिया के सबसे विश्वसनीय लॉन्च वाहनों में गिना जाता है, जिसने अब तक दर्जनों सैटेलाइट्स को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित किया है। इस मिशन के तहत कुल 15 सैटेलाइट्स को पृथ्वी की कक्षा में भेजा गया है। इनमें 7 भारतीय सैटेलाइट और 8 विदेशी सैटेलाइट शामिल हैं। विदेशी सैटेलाइट्स फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और यूनाइटेड किंगडम (यूके) से जुड़े हैं। मुख्य सैटेलाइट EOS-N1 अन्वेषा है, जिसे पृथ्वी से लगभग 600 किलोमीटर ऊपर सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट (SSO) में स्थापित किया जाएगा।

अन्वेषा सैटेलाइट क्यों है बेहद खास?

EOS-N1 अन्वेषा सैटेलाइट को डीआरडीओ ने विकसित किया है। यह एक अत्याधुनिक खुफिया (स्पाई) अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है। यह सैटेलाइट हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग (HRS) तकनीक पर आधारित है। यह सामान्य सैटेलाइट्स की तरह सिर्फ कुछ रंगों को नहीं, बल्कि सैकड़ों बारीक रंगों को पहचान सकता है। इसकी मदद से जमीन पर मौजूद मिट्टी, पेड़-पौधों, निर्माण गतिविधियों और इंसानी मूवमेंट की पहचान आसानी से हो जाती है। जंगलों, झाड़ियों या बंकरों में छिपी गतिविधियों की भी साफ और सटीक तस्वीरें लेने में यह सक्षम है। इस सैटेलाइट का इस्तेमाल सुरक्षा निगरानी, सीमा पर नजर रखने, मैपिंग और रणनीतिक योजना के लिए किया जाएगा।

मिशन को अंजाम किसने दिया

इस मिशन को New Space India Limited (NSIL) ने अंजाम दिया। NSIL, ISRO की कॉमर्शियल इकाई है, जो सैटेलाइट लॉन्च और अंतरिक्ष सेवाओं का व्यवसायिक संचालन करती है। हैदराबाद की निजी स्पेस कंपनी Dhruva Space ने भी इस मिशन के जरिए अपने 7 सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में भेजे हैं। यह भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

भारत के लिए यह मिशन क्यों महत्वपूर्ण है?

यह अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स से जुड़ा 9वां कॉमर्शियल मिशन है। पहली बार किसी भारतीय निजी कंपनी की PSLV मिशन में इतनी बड़ी भागीदारी देखने को मिली। इससे भारत की अंतरिक्ष तकनीक पर दुनिया का भरोसा और मजबूत हुआ है। यह मिशन भारत को वैश्विक स्पेस मार्केट में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करता है। गौरतलब है कि इसी PSLV रॉकेट से पहले Chandrayaan-1, Mangalyaan और Aditya-L1 जैसे ऐतिहासिक मिशन भी लॉन्च किए जा चुके हैं।

ISRO का यह मिशन न केवल भारत की सुरक्षा और निगरानी क्षमता को नई ऊंचाई देगा, बल्कि देश के निजी स्पेस सेक्टर को भी वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा। साल 2026 की यह शुरुआत भारत के अंतरिक्ष भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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एयर नाऊ स्पेशल

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