Wednesday, July 22, 2026

पेट्रोल-डीजल की महंगाई ने तेल कंपनियों को दी राहत, घाटा ₹1,000 करोड़ से घटकर ₹600 करोड़ हुआ

न्यूज डेस्क: देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी की गई है, जिससे आमजन की जेब पर गहरा असर पड़ा, लेकिन सरकारी तेल कंपनियों को इससे बहुत बड़ी राहत मिली है. सोमवार को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि 4 किस्तों में पेट्रोल-डीजल के दाम करीब ₹7.5 प्रति लीटर के बढ़ने से सरकारी तेल कंपनियों का दैनिक घाटा काफी कम हुआ है. मंत्रालय के अनुसार, अब इन कंपनियों का रोज का नुकसान घटकर लगभग ₹600 करोड़ प्रतिदिन रह गया है.

दम बढ़ने से तेल कंपनियों को राहत

संयुक्त सचिव ने कहा कि 15 मई से तेल की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ था, जिससे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस बेचने पर प्रतिदिन लगभग ₹1,000 करोड़ का भारी-भरकम नुकसान हो रहा था. वहीं दामों में ताजा बढ़ोतरी के बाद यह घाटकर ₹600 करोड़ से थोड़ा कम हुआ है. LPG की सब्सिडी पर सुजाता शर्मा ने साफ कहा कि इस ₹600 करोड़ के दैनिक घाटे में घरेलू एलपीजी की बिक्री पर होने वाला नुकसान भी शामिल है. चूंकि घरेलू रसोई गैस आज भी रियायती दरों बेची जाती है, इसलिए इसकी असली लागत और रिटेल प्राइस के बीच जो भी अंतर होता है, उसे सरकार खुद वहन करती है.

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घाटे की भरपाई के लिए बढ़ा दाम

नियम के अनुसार, भारत में पेट्रोल और डीजल बाजार आधारित मूल्य वाले उत्पाद हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम जैसी होगे, भारत में भी तेल की कीमतें वैसी ही होनी चाहिए. ईरान युद्ध के कारण जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ गईं, लेकिन फिर भी भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने देश में खुदरा कीमतों को लंबे समय तक नहीं बदला था. राजनीतिक और चुनावी संवेदनशीलता के कारण कीमतों को रोककर रखा गया था, जिसकी वजह से कंपनियों का लगातार घाटा रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया. फिलहाल उसी घाटे की भरपाई के लिए तेल की कीमतों में लगातार फेरबदल किया जा रहा है.

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