नई दिल्ली : रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन आज दो दिवसीय राजकीय दौरे के लिए भारत पहुंचे और उन्हें पहला भव्य स्वागत मिला। आज राष्ट्रपति भवन में उन्हें राष्ट्र के सर्वोच्च सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद वह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैदराबाद हाउस पहुंचे, जहां आज शाम से दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता होने जा रही है। रूस-भारत वार्षिक शिखर सम्मेलन के रूप में आयोजित इस मुलाकात का मकसद दोनों देश के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और भू-राजनीति समेत कई अहम मसलों पर चर्चा करना है। पुतिन की भारत यात्रा यूक्रेन युद्ध के बाद उनका पहला भारत दौरा है, और इसे मॉस्को-नयी दिल्ली के रणनीतिक साझेदारी को फिर से मजबूत करने के रूप में देखा जा रहा है।
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स्वागत समारोह

पुतिन के आगमन पर राष्ट्रपति भवन में गार्ड ऑफ ऑनर और 21 तोपों की सलामी दी गई, यह श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है। सेना, वायुसेना और नौसेना के जवानों ने परेड करते हुए पुतिन का स्वागत किया। उनका विमान 4 दिसंबर की शाम दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उतरा था, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने खुद उनका जलपान करते हुए और गले लगाकर स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेता एक ही कार में बैठकर सीधे हैदराबाद हाउस पहुंचे, इसी प्रकार का स्वागत पिछले साल मॉस्को में पुतिन ने मोदी को दिया था।

हैदराबाद हाउस में महत्वपूर्ण वार्ता
हैदराबाद हाउस, लुटियंस दिल्ली का ऐतिहासिक भवन है, जहां अक्सर उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकें होती हैं। आज की मुलाकात के दौरान, रक्षा सहयोग, परमाणु ऊर्जा, व्यापार एवं निवेश, आपूर्ति-श्रृंखला, तकनीक आदि कई अहम विषय चर्चा के केंद्र में होंगे। इसके अलावा, दोनों देश एक व्यापक आर्थिक और रक्षा साझेदारी को आगे ले जाने के लिए संभावित समझौते भी कर सकते हैं।

ऐसे समय में जब विश्व राजनीति और भू-राजनीतिक तनाव तेज है, भारत और रूस की यह मुलाकात दोनों देशों के रणनीतिक हितों के लिए अहम मानी जा रही है। औपचारिक बैठक के अलावा, इस दौरे में व्यापार मंत्रियों, रक्षा विशेषज्ञों और उद्योग नेताओं के साथ भी कई संवाद की उम्मीद है।

मित्रता बनेगी मजबूती
पुतिन की इस यात्रा से भारत-रूस के लंबे समय से चले आ रहे मित्रता और साझेदारी को नया आयाम मिलेगा। रक्षा से लेकर ऊर्जा, रक्षा निर्माण, तकनीक, आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक सहयोग तक, कई क्षेत्रों में नए अवसर खुल सकते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि इस मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत और समझौतों की लड़ी तेज हो सकती है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक मजबूत संदेश है।


