रांची : झारखंड की राजधानी रांची के चर्चित रियल एस्टेट कारोबारी समूह पानस रियल्टर्स और दयानंद मोदी समूह के खिलाफ आयकर विभाग के हुए सर्वे की कार्रवाई में अब तक 50 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति का खुलासा हुआ है, जिसे अवैध तरीके से अर्जित करने का आरोप है. इस बेनामी संपत्ति को लेकर आयकर विभाग ने जांच की कार्रवाई तेज कर दी है. आरोप है कि दोनों बिल्डर्स ने वैध दस्तावेजों की जगह कच्चे कागजों पर धड़ल्ले से काम कर इस संपत्ति को अर्जित किया था.
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करोड़ों की टैक्स की चोरी
आयकर विभाग की जांच के दौरान मिले दस्तावेजों के जरिए यह खुलासा हुआ है कि जमीन मालिकों और बिल्डरों ने सांठगांठ कर करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी की है. ऐसे में विभाग बिल्डर्स के साथ साथ उनके प्रोजेक्ट्स में निवेश करने वालों को भी जांच के दायरे में लाने की तैयारी में जुट गया है. जांच में यह बात भी सामने आई है इन दोनों बिल्डर्स से फ्लैट खरीदने वालों ने बड़ी रकम का भुगतान नकद में किया है.
सात बड़ी परियोजनाओं में टैक्स चोरी
आयकर विभाग की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि दोनों बिल्डर्स से जुड़े सात बड़े परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर टैक्स की चोरी हुई है. कहा जा रहा है कि इन प्रोजेक्ट्स में काले धन के जरिए नकदी का इस्तेमाल बहुत अधिक किया गया है, जबकि वैध कागजातों पर बेहद कम लेनदेन दिखाया गया है. मामले की जांच पूरी होने पर टैक्स चोरी का 50 करोड़ का आंकड़ा और भी बढ़ सकता है.
इसमें रांची वीमेंस कॉलेज के ठीक सामने स्थित पनास 99 परियोजना नारायण प्रसाद जालान के निर्देशन में संचालित पानस रियल्टर्स और दयानंद मोदी का ज्वाइंट वेंचर है. इसके अलावा लालपुर-कोकर मुख्य मार्ग पर आर्या के आगे स्थित दयानंद मोदी समूह की रोजवुड परियोजना की भी जांच हो रही है. रातू रोड स्थित मोदी हाइट्स प्रोजेक्ट पर भी आयकर अधिकारियों ने शिकंजा कसा है.


