Sunday, November 1, 2026

150 करोड़ से ऊपर के ट्रेजरी स्कैम को लेकर सरकार पर भाजपा का हमला, पूछा – बड़ी मछलियों की गिरफ्तारी कब?

रांची: झारखंड भाजपा ने एक बार फिर राज्य में सामने आए बहुचर्चित ट्रेजरी स्कैम के मुद्दे को उठाते हुए हेमंत सरकार पर पूरे मामले को दबाने और जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति करने का गंभीर आरोप लगाया है। प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि हजारीबाग, बोकारो, रांची, देवघर, पलामू, गोड्डा, जमशेदपुर, रामगढ़ और चाईबासा सहित कई जिलों के कोषागारों से जुड़ी अनियमितताओं की जांच सामने आ चुकी है। जिस मामले में राज्य के कई जिलों के कोषागार जांच के दायरे में हैं, उसे महज कुछ छोटे स्तर के पुलिसकर्मियों तक सीमित कर देना पूरे मामले की गंभीरता को छिपाने का प्रयास है।

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अजय साह ने कहा कि शुरुआती जांच में ही कथित वित्तीय अनियमितताओं का आंकड़ा डेढ़ सौ करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है। इतने बड़े पैमाने पर सरकारी कोष से धन की निकासी बिना उच्च स्तर की जानकारी, स्वीकृति और निगरानी के संभव नहीं हो सकती। इसलिए SIT और CID को केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रहने के बजाय उन सभी अधिकारियों और जिम्मेदार पदाधिकारियों की भूमिका की जांच करनी चाहिए, जिनके कार्यकाल में इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितताएं हुईं।

प्रदेश प्रवक्ता ने परीक्षा घोटाले की जांच का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार पहले परीक्षा घोटाले की जांच में कई लोगों को क्लीन चिट देने का प्रयास हुआ और बाद में छात्रों एवं युवाओं के आंदोलन के कारण जांच का दायरा बढ़ा कर बड़ी मछलियों को पकड़ा गया। उसी प्रकार ट्रेजरी स्कैम में भी जांच को केवल छोटे स्तर के आरोपियों तक सीमित कर बड़ी मछलियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

अजय साह ने कहा कि पुलिस से संबंधित कोषागार निकासी और वित्तीय प्रक्रिया में DDO यानी जिले के एसपी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में जिन जिलों और कार्यालयों में कथित तौर पर इतनी बड़ी राशि की अनियमित निकासी हुई, वहां तत्कालीन और वर्तमान जिले के एसपी पर अब तक कोई भी कार्यवाई का नहीं होना संदेह पैदा कर रहा है।

वहीं वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर पर निशाना साधते हुए श्री साह ने कहा कि वित्त विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे मंत्री के कार्यकाल में राज्य के कोषागारों से इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता सामने आती है, लेकिन जवाब देने की बजाय वित्त मंत्री केंद्र सरकार पर झारखंड के वित्तीय संकट की जिम्मेदारी डालने में व्यस्त दिखाई देते हैं। उन्होंने मांग की कि ट्रेजरी स्कैम की जांच को केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित न रखकर पूरे वित्तीय और प्रशासनिक तंत्र की जिम्मेदारी तय की जाए, सभी संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच हो और जहां भी आपराधिक संलिप्तता मिले, वहां कठोर कार्रवाई की जाए।

एयर नाऊ स्पेशल

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