कोच्चि: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। केरल के कोच्चि में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि RSS और BJP चाहती हैं कि देश की जनता सवाल न करे और चुप रहे, ताकि देश को कुछ चुनिंदा बिजनेसमैन के हाथों बेचा जा सके। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस ऐसा कभी होने नहीं देगी।
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संविधान बचाने की जिम्मेदारी कांग्रेस की
राहुल गांधी ने कहा कि आज देश में संविधान को बचाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी कांग्रेस पार्टी की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने संविधान के जरिए पंचायत, जिला और राज्य स्तर पर शासन को मजबूत किया। संविधान को बचाने का असली मतलब है सत्ता और फैसलों का अधिकार आम लोगों तक पहुंचाना। अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा कि RSS और BJP सत्ता को अपने पास ही सीमित रखना चाहती हैं, जबकि कांग्रेस सत्ता के विकेंद्रीकरण में विश्वास करती है। कांग्रेस गांव और कस्बों तक लोकतंत्र को मजबूत करना चाहती है, ताकि आम जनता भी फैसलों में भागीदार बन सके।
केरल चुनाव और UDF पर बयान
राहुल गांधी ने दिल्ली में हुई बैठकों का जिक्र करते हुए कहा कि अलग-अलग नेताओं की अलग राय थी, लेकिन उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि केरल में UDF पंचायत और विधानसभा चुनाव जीतेगा। उन्होंने कहा कि असली सवाल जीत के बाद का है और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना सबसे बड़ी चुनौती होगी। राहुल गांधी ने कहा कि केरल में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या है। उन्होंने कहा कि UDF और कांग्रेस को ऐसा ठोस रोडमैप तैयार करना होगा, जिससे युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें। उन्होंने मंच पर मौजूद कांग्रेस नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि यह नेतृत्व केरल की जनता की जरूरतों को समझता है और उन्हें पूरा करने की क्षमता रखता है।
साहित्य सम्मान कार्यक्रम में भी बोले राहुल
इससे पहले राहुल गांधी ने कलामासेरी में आयोजित एक कार्यक्रम में डॉ. एम. लीलावती को केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी का प्रियदर्शिनी साहित्य पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कोई भी देश चुप रहकर महान नहीं बन सकता। चुप रहने की संस्कृति में लालच छिपा होता है। राहुल गांधी ने कहा कि महान राष्ट्र और महान लोग वही होते हैं, जो अपने विचार और राय खुलकर व्यक्त करते हैं और उनके लिए संघर्ष करते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवाज उठाते रहें।


