लंदन/रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में लंदन पहुंचे झारखंड के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने ‘Historic England’ के साथ एक रणनीतिक बैठक की। इस दौरान इंग्लैंड की इस शीर्ष संस्था ने मुख्यमंत्री को विश्व प्रसिद्ध प्रागैतिहासिक स्थल ‘स्टोनहेंज’ और ‘एवेबरी’ के भ्रमण के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया है।
Highlights:
झारखंड के ‘मेगालिथ’ अब विश्व धरोहर की रेस में
बैठक का मुख्य केंद्र झारखंड की प्राचीन मेगालिथिक और मोनोलिथिक परंपराएं रहीं। मुख्यमंत्री ने पुरजोर तरीके से यह बात रखी कि झारखंड दुनिया के उन विरले क्षेत्रों में से है, जहाँ हजारों साल पुरानी पाषाण परंपराएं आज भी आदिवासी समुदायों के दैनिक जीवन और संस्कृति का हिस्सा हैं।
बैठक में विशेष चर्चा वाले स्थल
बैठक में झारखंड की प्रमुख विरासत स्थलों पकरी बरवाडीह (हजारीबाग), जो सूर्य की गति से संरेखित एक विशिष्ट मेगालिथिक परिसर है, मंदर जीवाश्म उद्यान, साहिबगंज, तथा राज्य के विभिन्न जिलों में फैले मोनोलिथ, शैलचित्र और पाषाण स्मारकों को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया।
“झारखंड की धरती केवल खनिजों की नहीं, बल्कि मानवता के शुरुआती अध्यायों की गवाह है। हमारी कोशिश है कि पकरी बरवाडीह और मंदर जैसे स्थलों को वही अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले जो स्टोनहेंज को प्राप्त है।” — हेमंत सोरेन
UK-India POCC 2025: सहयोग का नया ढांचा
यह बैठक ‘यूके-भारत व्यापक सांस्कृतिक सहयोग कार्यक्रम’ (POCC 2025) के तहत आयोजित की गई। इसके माध्यम से झारखंड सरकार और ब्रिटिश विरासत संस्थानों के बीच एक समझौता होगा, जिसके तहत झारखंड के स्थलों का आधुनिक तकनीक से दस्तावेजीकरण होगा। राज्य की विरासत को यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए विशेषज्ञ मदद ली जाएगी। समुदाय-आधारित विरासत प्रबंधन के जरिए स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए जाएंगे।
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“Sentinels of Time” का विमोचन
बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने “Sentinels of Time” नामक एक भव्य कॉफी टेबल बुक भी प्रस्तुत की। यह पुस्तक झारखंड के मेगालिथिक और जीवाश्म परिदृश्यों को शोध-आधारित आलेखों और दुर्लभ चित्रों के माध्यम से वैश्विक विशेषज्ञों के सामने पेश करती है।
इस बैठक में झारखंड की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार, कल्पना मुर्मू सोरेन (अध्यक्ष, महिला एवं बाल विकास समिति), मुख्य सचिव अविनाश कुमार और इंग्लैंड की ओर से सह-मुख्य कार्यकारी क्लॉडिया केन्याटा सहित कई ब्रिटिश पुरातत्व विशेषज्ञ शामिल रहे।


