एयरनाउ डेस्क : महंगाई की मार से राहत की खबर! सितंबर में रिटेल महंगाई फिसलकर पहुंची है आठ साल के सबसे निचले पायदान पर सिर्फ 1.54%। आखिरी बार ये आंकड़ा इतना नीचे था जून 2017 में।
Highlights:
CPI ग्राफ नीचे की ओर गिरता हुआ
सरकार ने 13 अक्टूबर को जारी किए हैं ये आधिकारिक आंकड़े। और रिजर्व बैंक की नजरें हमेशा इस टारगेट पर होती हैं 4% के आसपास की महंगाई, जिसमें ±2% की गुंजाइश होती है। यानी ये गिरावट RBI के दायरे से भी नीचे है
महंगाई के बास्केट में सबसे भारी हिस्सा होता है खाने-पीने की चीजों का करीब 50%। और यहीं आई है सबसे बड़ी गिरावट। महीने-दर-महीने की दर माइनस 0.64% से घटकर माइनस 2.28% हो गई है।
Rural vs Urban inflation
ग्रामीण इलाकों में महंगाई दर 1.69% से घटकर 1.07% पर आ गई है। वहीं शहरों में ये 2.47% से गिरकर 2.04% पर पहुंची है। यानी राहत दोनों तरफ है खेतों में भी और कॉलोनियों में भी।
महंगाई कैसे घटती-बढ़ती है?
महंगाई का खेल है डिमांड और सप्लाई का। जब लोगों के पास पैसा ज्यादा होता है, तो खरीदारी बढ़ती है। डिमांड बढ़ती है, और अगर सप्लाई पीछे रह जाए तो कीमतें चढ़ जाती हैं। लेकिन जब डिमांड कम हो और सप्लाई भरपूर तो महंगाई खुद-ब-खुद नीचे आ जाती है।
CPI क्या है?
रिटेल महंगाई को मापने का पैमाना है CPI यानी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स। ये बताता है कि आम ग्राहक को सामान और सेवाओं के लिए कितना खर्च करना पड़ रहा है। CPI में बदलाव यानी आपकी जेब पर असर पड़ना तय है। तो फिलहाल राहत की सांस ली जा सकती है लेकिन ये गिरावट कितनी टिकाऊ है, ये आने वाले महीनों में पता चलेगा। क्योंकि बाज़ार का मिज़ाज कभी स्थिर नहीं रहता।


