Tuesday, July 21, 2026

हेमंत सरकार ने पेसा एक्ट की आत्मा पर किया कुठाराघात, एक्ट का हुआ कोल्ड ब्लडेड मर्डर: अर्जुन मुंडा

रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री,पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने आज अधिसूचित पेसा नियमावली को लेकर राज्य सरकार पर बड़ा निशाना साधा। रविवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य में पेसा नियमावली लागू करने की मांग लंबे समय से चल रही थी। कई लोग अदालत में भी गए। सरकार को बाध्य किया। कई दिनों के उधेड़बुन के बाद कैबिनेट से पारित नियमावली सतह पर आई।

अर्जुन मुंडा ने कहा कि आदिवासी जनजाति समाज का स्वशासन उसकी पारंपरिक रूढ़िवादी व्यवस्था का अंग है जो आदिकाल से चला आ रहा लेकिन राज्य सरकार ने घोषित नियमावली के अभिप्रेत में ही इसकी आत्मा पर कुठाराघात कर दिया है। पेसा एक्ट 1996 से ही बना हुआ है लेकिन बेहतर तरीके से लागू करने के लिए राज्य सरकार को नियमावली बनाने की व्यवस्था है। लेकिन इसकी मूल भावना के साथ छेड़छाड़ करने का अधिकार किसी राज्य सरकार को नहीं है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि झारखंड सरकार ने जारी नियमावली में एक्ट के मूल विषय का एक प्रकार से कोल्ड ब्लडेड मर्डर करने का प्रयास किया है। किसी भी नियम की एक परिभाषा होती है जिसका उल्लेख उसके प्रस्तावना में किया जाता है। जो बताता है कि आगे इसका विस्तारित स्वरूप क्या होगा। झारखंड सरकार ने जो पेसा नियमावली घोषित किया है उसमें ग्रामसभा की निहित परिभाषा 1996 के एक्ट से अलग है। ग्राम सभा की परिभाषा में उसे छुपाया गया है। प्रस्तावना में परंपरा की बात कही गई है जबकि एक्ट में रूढ़िजन्य विधि, धार्मिक प्रथा एवं परंपराओं के आधार पर परिभाषित किया गया है जो आदिकाल से चली आ रही है। और उसे ही ग्राम सभा कही जाएगी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि नियमावली में परंपरा को भी परिभाषित नहीं किया है। जबकि इसके पूर्व देश के बाकी 9 राज्यों ने जहां पेसा एक्ट लागू है ने ग्रामसभा को एक्ट के अनुरूप ही परिभाषित किया है। जब मूल भावना ही खत्म हो जाएगी तो इसका परिणाम अच्छा नहीं होगा। राज्य सरकार ने जो नियमावली घोषित किए हैं उससे राज्य सरकार की मंशा उजागर हो गई है। घोषित नियमावली एक प्रकार से जनजाति समाज के साथ बड़ा धोखाधड़ी है। इस नियमावली को प्रशासन और संस्थाएं अपने हिसाब से व्यवस्था करेंगी। शासन तंत्र का संस्थागत विकास धाराशाई होगा।

अर्जुन मुंडा ने कहा कि भले ही नियमावली पृष्ठों के आधार पर बड़ा है लेकिन भावों के आधार पर शून्य है। जो बाद में संकट पैदा करेगा। झारखंड में नियमावली देर से बनने के बाद भी दुरुस्त नहीं बनी और मूल भावना से भटकती हुई दिख रही है। उन्होंने राज्य सरकार पर चारित्रिक आधार पर जनजाति समाज की पहचान बदलने का आरोप लगाया। जैसे व्यक्ति की पहचान उसके परिवार से है उसी प्रकार जनजाति समाज का भी एक चारित्रिक पहचान है।  5वीं अनुसूची के क्षेत्र वाले राज्य सरकार को संवेदनशील होकर कार्य करने की आवश्यकता है लेकिन झारखंड सरकार में ऐसा नहीं दिख रहा है। यह सरकार आदिवासियों के प्रति संवेदनहीन सरकार है।

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एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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