Lifestyle Desk: आजकल घर हो या ऑफिस, हर जगह लोग कमरे को खुशबूदार बनाने के लिए रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल करते हैं. एक स्प्रे या डिफ्यूजर से कमरा तुरंत फ्रेश लगने लगता है. लेकिन क्या ये खुशबू पूरी तरह सुरक्षित है? यही सवाल अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है. असल में रूम फ्रेशनर सिर्फ बदबू को ढकता है, उसे खत्म नहीं करता. और इसी दौरान इसमें मौजूद केमिकल हवा में मिलकर हमारी सेहत पर असर डाल सकते हैं.
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रूम फ्रेशनर की परेशानी
रूम फ्रेशनर इस्तेमाल करने के बाद कुछ लोगों को तुरंत ही दिक्कत महसूस होने लगती है. जैसे सिर दर्द, आंखों में जलन, नाक और गले में खराश, लगातार छींक आना, चक्कर आना या कभी-कभी सांस लेने में परेशानी. कुछ लोगों को घबराहट या बेचैनी भी महसूस हो सकती है. हर इंसान पर इसका असर अलग होता है, किसी को कम तो किसी को ज्यादा.
क्या कहती है स्टडी
कुछ स्टडी में पाया गया है कि एयर फ्रेशनर इस्तेमाल करने पर हवा में VOCs और छोटे-छोटे केमिकल पार्टिकल्स बढ़ सकते हैं. हालांकि सामान्य इस्तेमाल में ये तुरंत खतरनाक नहीं माने जाते, लेकिन अगर बंद कमरे में ज्यादा इस्तेमाल किया जाए तो परेशानी बढ़ सकती है.
रूम फ्रेशनर से सावधान
कुछ लोगों को रूम फ्रेशनर से खास तौर पर सावधान रहना चाहिए. जिन लोगों को अस्थमा है, उनकी सांस की समस्या बढ़ सकती है. सांस की पुरानी बीमारी वाले लोगों को खांसी और सांस फूलने की दिक्कत हो सकती है. एलर्जी वाले लोगों में रिएक्शन जल्दी हो सकता है. और जिन्हें तेज खुशबू से सिर दर्द या माइग्रेन होता है, उनके लिए यह ट्रिगर बन सकता है.
इसे पूरी तरह छोड़ दे
जरूरी नहीं कि हर किसी को रूम फ्रेशनर पूरी तरह छोड़ देना चाहिए. इसका असर हर व्यक्ति पर अलग होता है और यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि इसका इस्तेमाल कितना हो रहा है. अगर किसी को कोई दिक्कत नहीं होती तो सीमित मात्रा में इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन अगर बार-बार परेशानी हो रही है तो इसे अवॉइड करना ही बेहतर है.
फ्रेश रखने के आसान तरीके
कमरे को फ्रेश रखने के लिए हमेशा केमिकल पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है. खिड़की-दरवाजे खोलकर ताजी हवा आने दें, कमरे की नियमित सफाई रखें, कूड़ा समय पर बाहर फेंकें, नमी और फफूंदी को कंट्रोल करें और बेडशीट, पर्दे साफ रखें. इससे कमरा नेचुरली फ्रेश रहता है. रूम फ्रेशनर से कमरा तुरंत अच्छा तो लग सकता है, लेकिन इसके पीछे मौजूद केमिकल कुछ लोगों के लिए परेशानी भी बन सकते हैं. इसलिए समझदारी से इस्तेमाल करें और अगर शरीर संकेत दे रहा है तो उसे नजरअंदाज न करें. असल फ्रेशनेस खुशबू में नहीं, बल्कि साफ हवा और साफ वातावरण में होती है.

