Saturday, October 31, 2026

भाजपा के लिए हर आदिवासी-मूलवासी का सवाल दिमागी नक्सल : विनोद कुमार पांडेय

रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, रघुवर दास और भाजपा पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा की राजनीति में झारखंड के आदिवासी-मूलवासी, गरीब और अपने अधिकार की आवाज उठाने वाले हर व्यक्ति को संदेह की नजर से देखना एक खतरनाक मानसिकता बन गई है। सवाल यह है कि क्या भाजपा की नजर में हर आदिवासी-मूलवासी, हर झारखंडी और केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाने वाला व्यक्ति ‘दिमागी नक्सल’ है?

उन्होंने कहा कि चुनी हुई सरकार और उसके मुख्यमंत्री को बदनाम करने के लिए नक्सल जैसे गंभीर शब्दों का राजनीतिक इस्तेमाल भाजपा की हताशा को दिखाता है। झारखंड के लोग लोकतांत्रिक तरीके से अपनी जमीन, जंगल, पानी, खनिज और रोजगार पर अधिकार मांगते हैं। इसे नक्सलवाद कहना झारखंड की जनता का अपमान है।

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आंकड़े गिनाने से पहले दर्द समझें

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेताओं को झारखंड के खनिज पर आंकड़े गिनाने से पहले उन गांवों का दर्द समझना चाहिए, जिनकी जमीन खदानों के लिए गई, जंगल उजड़े और पीढ़ियां विस्थापन झेलती रहीं। सवाल केवल राजस्व या निवेश का नहीं, बल्कि यह है कि खनिज संपदा से झारखंडी जनता को कितना न्याय मिला।

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के एमएमडीआर संशोधन अधिनियम संबंधी बयान पर पांडेय ने कहा कि भाजपा 11 हजार करोड़ रुपये और करों के प्रतिशत की चर्चा करके मूल सवाल से ध्यान भटका रही है। यदि खनिज से राज्य को लाभ मिलता है तो खनन प्रभावित गांवों में आज भी पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और रोजगार की कमी क्यों है? डीएमएफ की व्यवस्था तभी सार्थक है, जब उसका लाभ वास्तव में प्रभावित समुदायों तक पहुंचे।

औद्योगिक विकास का विरोध नहीं

उन्होंने कहा कि झामुमो खनन या औद्योगिक विकास का विरोध नहीं करता। हमारी मांग स्पष्ट है—जमीन का सम्मान, जंगल की रक्षा, आदिवासी अधिकारों की सुरक्षा, स्थानीय युवाओं को रोजगार और खनिज संपदा में झारखंडी हित की प्राथमिकता।

विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा को यह समझना होगा कि झारखंड अब केवल खनिज निकालने की भूमि नहीं है। यहां के लोग अपने संसाधनों पर न्यायपूर्ण अधिकार चाहते हैं। इस आवाज को नक्सलवाद कहना बंद कीजिए और झारखंड के दर्द को समझिए। उन्होंने बाबूलाल मरांडी से कहा कि राजनीतिक असहमति को नक्सलवाद से जोड़ना आपकी भाषा की कमजोरी है, झारखंड की जनता की नहीं। जनता सब देख रही है और लोकतंत्र में अंतिम फैसला वही करेगी।

एयर नाऊ स्पेशल

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