रांची: एफसीआरए यानी The Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026,बिल को संसद से जेपीसी यानी संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया है. जो इस बिल की विस्तृत जांच करेगी. और फिर इसकी रिपोर्ट सौपेंगी. बहरहाल,विदेशी चंदों पर सख्ती वाला विधेयक में आखिर इतना विरोध क्यों हो रहा है. इसे कब पेश किया गया था. एफसीआरए बिल में किस तरह की नई व्यवस्था की गई कि विपक्ष दलों ने इसे वापस लेने की मांग कर दी.
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दरअसल, 12 अगस्त को केंद्र सरकार ने मानसून सत्र के दौरान जारी हंगामे के बीच फॉरन कंट्रीब्यूशन रेगुलेश्न एक्ट 2026 को विस्तृत समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने का फैसला लिया है. इसके लिए संसद के द्वारा एक प्रस्ताव पास किया गया है. लोकसभा में इस बिलो जेपीसी में भेजने के लिए नित्यानंद राय के प्रस्ताव रखा.
बता दें कि जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी में कुल 31 सदस्य होंगे, जिनमें से 21 सदस्य लोकसभा से और 10 सदस्य राज्यसभा से होंगे. जो इस बिल की विस्तृत जांच करेंगे. अब सवाल ये भी है कि इस रिपोर्ट को कब तक सौंपा जाएगा. तो बता दें कि समिति को अपनी गहन जांच और समीक्षा के बाद रिपोर्ट संसद के आगामी शीतकालीन सत्र 2026 के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक लोकसभा के समक्ष जमा करना होगा.
समिति के कामकाज पर संसदीय समितियों से संबंधित लोकसभा के प्रक्रिया और कार्य संचालन नियम लागू होंगे. जिनमें आवश्यकतानुसार अध्यक्ष द्वारा संशोधन किए जा सकेंगे. प्रस्ताव के माध्यम से लोकसभा ने राज्यसभा से इस जेपीसी में शामिल होने और अपने 10 सदस्यों के नामों की औपचारिक सूचना देने की सिफारिश की है.
बता दें कि 25 मार्च 2026 को इस बिल को लोकसभा में पेश किया गया था. ये बिल एक भारतीय कानून है जो देश में एनजीओ, धार्मिक संस्थाओं और संगठनों को मिलने वाले विदेशी चंदे को कंट्रोल और विनियमित करता है.यानी आसान भाषा में कहे तो, ये कानून सुनिश्चित करता है कि भारत में मिलने वाले विदेशी पैसा देश की आंतरिक सुरक्षा और राष्ट्रीय हित के खिलाफ इस्तेमाल न हो. मूल रूप से ये कानून पहली बार साल 1976 में पेश किया गया था. जिसके बाद साल 2010 में नए रूप में और समय समय पर संशोधित किया गया और इसे मार्च 2026 में इस बिल में संशोधन करके पेश किया गया था. जिसे अब जेपीसी के पास भेज दिया गया है. बहरहाल, मानसून सत्र के दौरान इस बिल को लेकर विपक्ष लगातार हंगामा कर रहा था. विपक्ष का कहना था कि सरकार अल्पसंख्यकों और एनजीओ को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है. हमारी मांग है कि सरकार इस बिल को वापस ले. विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, केसी वेणुगोपाल ने गलत बोला है. कई दिनों से कांग्रेस और अन्य दलों ने मांग की कि एफसीआरए संशोधन विधेयक को जेपीसी में भेजा जाए. जब इस महत्वपूर्ण बिल को जेपीसी में भेज रहे हैं तो विपक्ष को इस पर आपत्ति हो रही है.

