Wednesday, September 16, 2026

सीएम हेमंत सोरेन के विदेश दौरे में झारखण्ड की मेगालिथ संस्कृति को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का होगा प्रयास

रांची : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन आगामी दावोस और यूके की यात्रा सिर्फ़ झारखण्ड की औद्योगिक क्षमता से दुनिया को अवगत कराने एवं शिक्षा के उन्नयन के लिए नहीं, बल्कि यहां की कंदराओं और जंगलों में प्राचीन काल से अवस्थित पाषाणों को सम्मान देने के लिए भी कर रहें हैं। दुनिया इस बात से भी अवगत हो सके कि यह झारखण्ड राज्य का सिंहभूम क्षेत्र है जहां वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी की यह वह पहली जमीन थी जो समुद्र से ऊपर उठी थी। एक ओर यहां के पंक्तिबद्ध मेगालीथ सूर्य की गति और दिन-रात की समयावधि से संबंधित हैं वहीं दूसरी ओर गुफाओं में प्राचीन काल से अवस्थित भित्ति चित्र और जीवाश्मयुक्त वन प्रांतर एक अद्भुत एवं दुर्लभ भू-दृश्य की निरंतरता का भी निर्माण करते हैं।

झारखण्ड के पत्थर किसी भूले हुए संसार के अवशेष नहीं हैं, बल्कि आज भी जीवंत हैं, जो हजारों वर्षों से चली आ रही विरासत, खगोल विज्ञान और उससे जुड़ी मानवीय चेतना को दर्शाती है। इन सब को समाहित कर दावोस और यूनाइटेड किंगडम की अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल झारखण्ड में मौजूद पृथ्वी के सबसे पुराने पाषाणों और उसकी सांस्कृतिक निरंतरता का सत्य भी बताएगा, ताकि अब तक उपेक्षित इन मेगालीथ को वैश्विक धरोहर के रूप में पहचान और सम्मान दिलाया जा सके।

विरासत को संरक्षित रखने का लक्ष्य

झारखण्ड के महापाषाणकालीन भू-दृश्य, जो दूरस्थ संग्रहों में नहीं बल्कि राज्य के सुदूर गांवों और जंगलों में संरक्षित हैं, इस बात का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करते हैं कि विरासत को समुदायों के भीतर समाहित रखते हुए कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है। यह भारत और यूनाइटेड किंगडम के सांस्कृतिक संरक्षण और सहयोग की कसौटी के साथ घनिष्ठ रूप से मेल भी खाता है, जो नैतिक संरक्षण, संग्रहालय साझेदारी, अनुसंधान के आदान-प्रदान और विरासत को यथास्थान संरक्षित रखने को बढ़ावा देता है।

यूके के स्टोनहेंज जैसे स्थलों से कमतर नहीं झारखण्ड

हजारीबाग के पकरी बरवाडीह में अवस्थित मेगालीथ सूर्य की गति और इक्वीनौक्स से संबंधित हैं, जिससे झारखण्ड के प्रागैतिहासिक काल को वैश्विक इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त होता है। इन पत्थरों की संरचनाएं यूनाइटेड किंगडम के स्टोनहेंज जैसे प्रतिष्ठित स्थलों से तुलना की जा सकती है, जो महाद्वीपों और सदियों से चली आ रही मानव प्रवृत्ति को दर्शाती हैं, जिसके तहत समय, मृत्यु और ब्रह्मांडीय व्यवस्था को पत्थर में अंकित किया गया है। इस्को के शैल चित्रों के साथ सोहराय और कोहबर पेंटिंग की निरंतरता तथा मंडरो के फासिल्स दुर्लभ भू-दृश्य का निर्माण करते हैं जहाँ प्राचीन काल और जीवंत मानव संस्कृति एक ही भौगोलिक क्षेत्र में सह-अस्तित्व में वास करती है।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में दावोस और यूनाइटेड किंगडम में झारखण्ड अपनी आर्थिक और विकास के विजन को प्रस्तुत करके एक ऐसा परिदृश्य प्रदान कर रहा है जो वैश्विक चर्चा के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी भी देश और राज्य का दीर्घकालिक विकास सांस्कृतिक निरंतरता और बीते हुए समय के प्रति सम्मान पर आधारित होना चाहिए। अंत में यह भी कहा जा सकता कि पाषाण युग से लेकर इतिहास के पन्नों को स्वर्ण अक्षरों से लिखता हुआ झारखण्ड, आज के युग में देश की अर्थव्यवस्था और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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एयर नाऊ स्पेशल

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