रांची : झारखंड में तीन हजार से ज्यादा सरकारीकर्मी अचानक बेरोजगार हो गए हैं क्योंकि राज्य सरकार ने बीते सोमवार को जेएसएससी सीजीएल और जेपीएससी की 21 परीक्षाओं को रद्द कर दिया था और मंगलवार को अधिसूचना जारी की गई थी. इसके बाद से सचिवालय में कार्यरत सहायक प्रशाखा पदाधिकारी समेत सैकड़ों लोग सरकारी नौकरी से सेवामुक्त हो गए है. सरकार के इस फैसले के खिलाफ अब सेवामुक्त सचिवालय कर्मी अपनी नौकरी फिर से बहाल करने और जारी अधिसूचना को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. इसे लेकर तीसरे दिन सचिवालय के बाहर उनका धरना प्रदर्शन जारी है.
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“न्याय दो या फांसी दो”

गुरूवार को धुर्वा स्थित प्रोजेक्ट भवन के सामने सेवामुक्त सचिवालय कर्मियों का विरोध-प्रदर्शन और अधिक उग्र नजर आया. कई लोगों ने अपने गले में फांसी का फंदा डालकर सड़क पर धरने पर बैठे नजर आए, इस दौरान मुख्य द्वार के बाहर जमकर नारेबाजी हुई. “न्याय दो या फांसी दो” के नारों से नौकरी से बाहर किए कर्मियों ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से वह अपनी बात सरकार को बता रहे हैं कि उन्हें सेवा में वापस लिया जाए, नियुक्तियां रद्द करने वाली अधिसूचना को रद्द किया जाए. हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाए.
प्रदर्शन की मिली अनुमति
इससे पहले प्रोजेक्ट भवन (सचिवालय) के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन कर रहे पूर्व सचिवालयकर्मियों को सचिवालय की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों ने यह कहते हुए हटाने की कोशिश की कि सुरक्षित क्षेत्र होने के मद्देनजर वहां बीएनएस की धारा 163 लागू है, इसके तहत बिना अनुमति धरना या प्रदर्शन की अनुमति नहीं है. उन्हें विधानसभा के समीप स्थित कुटे मैदान जाकर अपना आंदोलन जारी रखने की सलाह दी गई.

