News Desk: दीवाली का त्योहार सिर्फ एक दिन की पूजा और रोशनी का पर्व नहीं है. इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और भाई दूज के साथ इसका समापन होता है. इन पांच दिनों में घरों में दीपक जलाने की परंपरा निभाई जाती है. हर दिन दीपक जलाने का अलग महत्व बताया गया है. Diwali Tradition में दीपक जलाना सबसे खास माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, दीपक अंधकार को दूर कर सकारात्मकता, सुख और समृद्धि का प्रतीक होता है. यही वजह है कि धनतेरस से लेकर भाई दूज तक लोग हर शाम दीप जलाते हैं.
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Diwali Tradition: धनतेरस पर क्यों जलाया जाता है यम दीपक
दीपोत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है. इस दिन भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. इसके अलावा घर की दक्षिण दिशा में यमराज के नाम का दीपक जलाने की भी परंपरा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस के दिन यम दीपक जलाने से परिवार की सुरक्षा और लंबी उम्र की कामना की जाती है. लोग इस दिन अपने घर में सुख शांति और खुशहाली बनाए रखने के लिए दीप जलाते हैं. धनतेरस पर जलाया जाने वाला दीपक पांच दिनों तक चलने वाले दीपोत्सव की शुरुआत का संकेत माना जाता है.
Diwali Tradition: छोटी दीवाली पर दीप जलाने का महत्व
धनतेरस के बाद छोटी दीवाली या नरक चतुर्दशी मनाई जाती है. इस दिन भी घरों में दीपक जलाए जाते हैं और रोशनी से सजावट की जाती है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था और लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी. इसलिए छोटी दीवाली पर दीप जलाना बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. लोग अपने घरों में दीप जलाकर सकारात्मक ऊर्जा और खुशियों का स्वागत करते हैं.
Diwali Tradition में सबसे खास है दीपों वाली रात
दीवाली के दिन दीपक जलाने की परंपरा सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है. कार्तिक अमावस्या की रात भगवान श्रीराम, माता सीता और भाई लक्ष्मण के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में पूरे नगर को दीपों से सजाया गया था. इसी वजह से दीवाली पर दीप जलाने की परंपरा शुरू हुई मानी जाती है. इस दिन लोग माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं और घर के हर कोने में दीपक जलाते हैं. मान्यता है कि दीपों की रोशनी जीवन से नकारात्मकता को दूर करती है और घर में सुख, शांति और समृद्धि का वातावरण बनाती है.
Diwali Tradition: गोवर्धन पूजा पर क्यों जलाए जाते हैं दीपक
दीपोत्सव के चौथे दिन गोवर्धन पूजा होती है. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है. पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों को देवराज इंद्र के प्रकोप से बचाया था. कहा जाता है कि इस खुशी में लोगों ने भगवान कृष्ण की पूजा की और दीप जलाए. इसी कारण गोवर्धन पूजा के दिन भी दीपक जलाने की परंपरा चली आ रही है. इस दिन लोग अपने घरों को सजाते हैं और भगवान से परिवार की सुख समृद्धि की प्रार्थना करते हैं.
Diwali Tradition: भाई दूज पर दीपक जलाने की परंपरा
पांच दिवसीय दीपोत्सव का आखिरी दिन भाई दूज होता है. यह त्योहार भाई बहन के प्यार और मजबूत रिश्ते का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे. इसी वजह से बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं. भाई दूज पर बहनें भाई का तिलक करती हैं, आरती उतारती हैं और दीपक जलाती हैं. यह दीपक भाई बहन के रिश्ते में प्रेम और सुरक्षा की भावना को दर्शाता है.
Diwali Tradition: पांच दिनों तक दीप जलाने की परंपरा क्यों है खास
Diwali Tradition सिर्फ घर को रोशन करने की परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे धार्मिक भावनाएं और पुरानी मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. धनतेरस का दीपक सुरक्षा और स्वास्थ्य की कामना से जुड़ा है. छोटी दीवाली का दीपक अच्छाई की जीत का प्रतीक है. दीवाली के दीपक भगवान राम के अयोध्या आगमन की खुशी को दर्शाते हैं. वहीं गोवर्धन पूजा और भाई दूज पर जलाए जाने वाले दीपक प्रकृति, परिवार और रिश्तों के महत्व को दिखाते हैं. यही वजह है कि आज भी धनतेरस से भाई दूज तक दीप जलाने की परंपरा देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जाती है.
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