नई दिल्ली: वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (स्पेशल इंटेसिव रिवीज़न) को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्जल भुइयां ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत मिले मतदान के अधिकार से कोई भी प्राधिकरण छेड़छाड़ नहीं कर सकता.
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कानूनी मामलों की समाचार वेबसाइट बार एंड बेंच के मुताबिक़, उन्होंने स्पष्ट कहा कि संविधान से ऊपर कोई नहीं है और न ही कोई संस्था मतदाताओं के अधिकारों को मनमाने ढंग से प्रभावित कर सकती है. जस्टिस भुइयां ने कहा कि अगर किसी प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक वोट करने के अधिकार से वंचित हो जाते हैं तो ऐसी प्रक्रिया को मूल रूप से मनमाना कहा जाएगा.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि किसी भी तरह के तर्क से इसे सही नहीं ठहराया जा सकता. उन्होंने यह भी कहा कि किसी मतदाता का नाम एक बार वोटर लिस्ट में दर्ज हो जाने के बाद उसे बिना नोटिस दिए और सुनवाई का अवसर दिए हटाया नहीं जा सकता. उन्होंने कहा कि केवल डेड वोटर के केस में यह अपवाद हो सकता है. जस्टिस भुइयां ने कहा कि ऐसा कोई कदम न तो कोई प्राधिकरण उठा सकता है और न ही कोई अदालत उसे मंज़ूरी दे सकती है.


