अयोध्या: राम नगरी अयोध्या स्थित राम मंदिर में रामलला के चढ़ावे / दान में हुई कथित चोरी और वित्तीय अनियमितता के मामले ने अब एक बेहद गंभीर मोड़ ले लिया है। चौतरफा बढ़ते दबाव और एसआईटी (SIT) की शुरुआती जांच रिपोर्ट लीक होने के बाद, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और प्रमुख ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
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दोनों ने नैतिकता का हवाला देते हुए अपना इस्तीफा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को सौंपा है। सूत्रों के मुताबिक, मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव को भी मंदिर प्रबंधन और व्यवस्था से तत्काल प्रभाव से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
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सीएम योगी के दौरे से ही मिलने लगे थे संकेत
चंपत राय के पास पूरे मंदिर प्रबंधन की कमान थी, जबकि अनिल मिश्रा और गोपाल राव उनकी कोर टीम का हिस्सा थे। इस बड़े एक्शन की सुगबुगाहट एक हफ्ते पहले ही शुरू हो गई थी, जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या के दौरे पर पहुंचे थे। उस महत्वपूर्ण वीआईपी कार्यक्रम और बैठकों से चंपत राय को पूरी तरह दूर रखा गया था। तभी से यह कयास लगाए जा रहे थे कि सरकार इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाने जा रही है और गाज गिरना तय है।
वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कर दिया है कि राम भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार जांच रिपोर्ट के आधार पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई कर रही है।
8 आरोपी गिरफ्तार, आज कोर्ट में पेशी
चढ़ावा चोरी के इस सनसनीखेज मामले में अब तक रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा समेत कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस आज इन सभी को अदालत में पेश करेगी।
गुरुवार देर शाम ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर पहली एफआईआर ( FIR ) दर्ज की गई थी। हालांकि, इस शुरुआती एफआईआर में चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा या किसी अन्य शीर्ष पदाधिकारी का नाम सीधे तौर पर शामिल नहीं है, लेकिन नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शीर्ष नेतृत्व का इस्तीफा देना इस बात का संकेत है कि गड़बड़ी के तार गहरे हैं।
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विपक्ष हमलावर: संजय राउत और केजरीवाल के तीखे तीर
इस पूरे घटनाक्रम के बाद देश की सियासत भी गरमा गई है। विपक्ष ने सीधे तौर पर पारदर्शिता और मंदिर ट्रस्ट के गठन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट कर सवाल किया कि— “राम मंदिर के लिए उद्धव ठाकरे द्वारा दान की गई 4 किलो चांदी की ईंट कहां गई? अब जवाबदेही तय करने का समय आ गया है।”
इधर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को रामलला के दर्शन किए और मीडिया से बात करते हुए कहा— “जिन्होंने यह महापाप किया है, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। यह एफआईआर महज एक दिखावा है, असल में बड़े चेहरों और मगरमच्छों को बचाने की कोशिश की जा रही है।”

40 दिन में 70 बार चोरी: SIT की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
यह पूरा मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एक उच्चस्तरीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि बीते 40 दिनों के भीतर लगभग 70 बार दान और नकदी की हेराफेरी की गई। 23 जून को यह रिपोर्ट एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी गई थी, जिसके बाद से ही आरोपियों की धरपकड़ और इस्तीफों का सिलसिला तेज हो गया है।
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