BRICS: पालम एयरपोर्ट पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का विमान उतर चुका है। करीब सात साल बाद जिनपिंग भारत की ज़मीन पर हैं। और इस लैंडिंग के साथ भारत-चीन रिश्तों में एक बेहद अहम अध्याय फिर खुल गया है। क्योंकि ये वही शी जिनपिंग हैं, जिनके कार्यकाल में भारत और चीन के रिश्ते 2020 के गलवान संघर्ष के बाद सबसे मुश्किल दौर में पहुंचे थे। गलवान के बाद दोनों देशों की सीमा पर तनाव बढ़ा, हजारों सैनिक आमने-सामने तैनात हुए और भारत-चीन रिश्तों में भरोसे की बड़ी कमी आई। लेकिन अब छह साल बाद तस्वीर बदलती हुई दिखाई दे रही है। आज शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग आमने-सामने बैठेंगे।
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अब सवाल ये है कि इस मुलाकात में सिर्फ हाथ मिलेंगे, तस्वीरें खिंचेंगी और औपचारिक बातें होंगी. या फिर गलवान के बाद बिगड़े भारत-चीन रिश्तों को सुधारने के लिए कोई बड़ा रास्ता निकलेगा?क्योंकि मोदी-जिनपिंग की इस मुलाकात के पीछे LAC है।गलवान है।सीमा पर सैनिकों की तैनाती है।भारत-चीन के बीच भारी व्यापार घाटा है।और सबसे बढ़कर, दोनों देशों के बीच टूटा हुआ भरोसा है।दुनिया की नजर इस बात पर है कि भारत और चीन अपने रिश्तों को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं।
इस पूरी कहानी को समझने के लिए आपको 2020 के गलवान से लेकर आज की इस मुलाकात तक की पूरी तस्वीर समझनी होगी।तो सवाल सीधा है, क्या जिनपिंग की सात साल बाद भारत वापसी भारत-चीन रिश्तों में नई शुरुआत का संकेत है?या फिर ये सिर्फ कूटनीति की एक तस्वीर है, जिसके पीछे पुराने मतभेद अब भी वैसे ही खड़े हैं?इस सवाल का जवाब आज शाम मिल सकता है।


