रांची में JSSC-CGL के चयनित अभ्यर्थियों ने परीक्षा रद्द किए जाने की चर्चाओं के बीच प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार से नियुक्ति प्रक्रिया जारी रखने की मांग की है। अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो दोषियों की पहचान कर कार्रवाई हो, लेकिन हजारों निर्दोष चयनित अभ्यर्थियों को इसकी सजा न दी जाए।
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शनिवार को JSSC-CGL चयनित अभ्यर्थी न्याय मंच की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें चयनित अभ्यर्थियों ने परीक्षा रद्द किए जाने की चर्चाओं और अपने भविष्य को लेकर चिंता जताई। अभ्यर्थियों का कहना है कि करीब 10 वर्षों की मेहनत और संघर्ष के बाद वे चयन प्रक्रिया के अंतिम चरण तक पहुंचे हैं। ऐसे में कुछ अभ्यर्थियों पर लगे आरोपों के आधार पर पूरी परीक्षा रद्द करने की बात से हजारों उम्मीदवारों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
अभ्यर्थियों ने बताया कि JSSC-CGL परीक्षा के लिए करीब छह लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। इनमें से लगभग 30 हजार अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए, जबकि करीब 26 हजार उम्मीदवारों ने तीनों पेपर दिए। इसके बाद लगभग दो हजार अभ्यर्थियों का चयन हुआ। चयनित अभ्यर्थियों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें लंबे समय तक अनिश्चितता का सामना करना पड़ा और नियुक्ति को लेकर करीब एक साल तक कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि चयनित उम्मीदवारों में 600 से ज्यादा आदिवासी अभ्यर्थी शामिल हैं। इनमें कई ऐसे परिवारों से आते हैं जिनके पास आर्थिक संसाधन सीमित हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि इन उम्मीदवारों ने मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद वर्षों तक तैयारी की और अब चयन के बाद नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।
JSSC-CGL अभ्यर्थियों की मांग
अभ्यर्थियों ने मांग की कि अगर परीक्षा के किसी चरण में गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जांच में जिन लोगों की भूमिका सामने आए, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। लेकिन पूरी परीक्षा और चयन प्रक्रिया को रद्द करने से उन उम्मीदवारों पर भी असर पड़ेगा जिनका कथित गड़बड़ी से कोई लेना देना नहीं है।
JSSC-CGL अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर बार बार बदलती स्थिति के कारण चयनित अभ्यर्थियों को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई उम्मीदवार नियुक्ति की उम्मीद में अपने भविष्य से जुड़े दूसरे फैसले भी रोक चुके हैं। ऐसे में परीक्षा रद्द होने की चर्चा ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है।
चयनित अभ्यर्थियों ने सरकार और संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि जांच की प्रक्रिया अपनी जगह चलनी चाहिए, लेकिन निर्दोष चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर किसी ने गड़बड़ी की है तो कार्रवाई उस व्यक्ति पर होनी चाहिए, वर्षों तक मेहनत करने वाले सभी चयनित उम्मीदवारों पर नहीं।


