रांची: JPSC घोटाला यानी झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में गड़बड़ी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे परीक्षा प्रणाली से जुड़े फर्जीवाड़े की नई परतें सामने आ रही हैं। CID की केस डायरी में दर्ज जांच के मुताबिक, कथित तौर पर सिर्फ अभ्यर्थियों तक सीमित कोई अनियमितता नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क के काम करने के संकेत मिले हैं। जांच में OMR शीट, डिजिटल डेटा, वित्तीय लेनदेन और आरोपियों के बीच हुई बातचीत को अहम साक्ष्य माना जा रहा है।
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सबसे चौंकाने वाला मामला एक ऐसे अभ्यर्थी का सामने आया है, जिसने परीक्षा के दौरान कथित तौर पर केवल 48 सवालों के जवाब दिए थे। लेकिन परीक्षा के बाद जब JPSC के स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखी मूल OMR शीट और AWS क्लाउड सर्वर पर मौजूद डेटा की फोरेंसिक जांच की गई, तो उसमें 99 प्रश्नों के उत्तर दर्ज मिले। जांच एजेंसी के सामने यह अंतर अब बड़ा सवाल बनकर उभरा है कि परीक्षा समाप्त होने के बाद OMR शीट में अतिरिक्त उत्तर आखिर किस स्तर पर और किसकी मदद से भरे गए।
48 सवालों से 99 जवाब तक कैसे पहुंची OMR
OMR आधारित प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थी द्वारा भरे गए उत्तरों का रिकॉर्ड परीक्षा प्रक्रिया का सबसे अहम हिस्सा होता है। ऐसे में यदि परीक्षा के दौरान दिए गए उत्तरों और बाद में उपलब्ध मूल OMR रिकॉर्ड में बड़ा अंतर पाया जाता है, तो यह परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
CID की जांच में सामने आए इस मामले में कथित तौर पर अभ्यर्थी के परीक्षा के समय दिए गए उत्तरों और बाद के रिकॉर्ड का मिलान किया गया। शुरुआती तौर पर जहां 48 उत्तर दर्ज होने की बात सामने आई, वहीं फोरेंसिक जांच में 99 उत्तर पाए गए। जांच एजेंसी अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि बाकी उत्तर परीक्षा समाप्त होने के बाद किस तरह OMR में शामिल हुए।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि CID पहले ही JPSC से जुड़ी परीक्षाओं में बड़ी संख्या में OMR शीट से छेड़छाड़ की आशंका की जांच कर रही है। 11 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, CID की केस डायरी में दो परीक्षाओं की करीब 500 OMR शीट में कथित छेड़छाड़ का उल्लेख सामने आया है।
JPSC घोटाला में 80 लाख की डील
JPSC घोटाला जांच का दूसरा अहम सिरा कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़ा है। CID के अनुसार, एक अभ्यर्थी और बिचौलिये पवन कुमार सिंह के बीच करीब 80 लाख रुपये में नौकरी की कथित डील हुई थी। इसमें करीब 16 लाख रुपये एडवांस के तौर पर दिए जाने की बात सामने आई है।
जांच एजेंसी को बैंक खातों के जरिए हुए UPI और RTGS ट्रांजैक्शन के रिकॉर्ड भी मिले हैं। इनमें करीब 15.90 लाख रुपये का कथित प्रत्यक्ष वित्तीय ट्रेल सामने आने की बात कही जा रही है। जांच के मुताबिक, यह रकम JPSC अभ्यर्थी सुमन सौरभ की ओर से कथित तौर पर पवन कुमार सिंह तक पहुंची थी।
CID ने सुमन सौरभ को जुलाई 2026 में गिरफ्तार किया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, गिरफ्तारी CID थाना कांड संख्या 16/2026 के तहत चल रही जांच के दौरान हुई और उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया। CID का आरोप है कि उसने अनुचित साधनों के जरिए परीक्षा में सफलता हासिल की।
WhatsApp चैट भी जांच के घेरे में
वित्तीय रिकॉर्ड के अलावा CID को पवन कुमार सिंह और सुमन सौरभ के बीच हुई कथित WhatsApp बातचीत भी मिली है। जांच एजेंसी इन डिजिटल साक्ष्यों को लेनदेन और परीक्षा में कथित सेटिंग के आरोपों से जोड़कर देख रही है।
JPSC घोटाला जांच का फोकस अब यह पता लगाने पर है कि अभ्यर्थी और बिचौलियों के बीच संपर्क कैसे हुआ, पैसे किसके जरिए और किन खातों में पहुंचे तथा कथित तौर पर परीक्षा परिणाम प्रभावित करने की व्यवस्था में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
अभय तिवारी के सिंडिकेट की भूमिका की जांच
JPSC घोटाला मामले में अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी का नाम जांच के केंद्र में है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, CID ने उसे कथित परीक्षा सिंडिकेट के प्रमुख आरोपियों में शामिल किया है। तिवारी पर अभ्यर्थियों से पैसे लेकर सरकारी भर्ती परीक्षाओं में चयन की कथित सेटिंग कराने का आरोप है। अगस्त में सामने आई रिपोर्टों में CID पूछताछ के हवाले से 14वीं JPSC परीक्षा में 100 से अधिक अभ्यर्थियों को पैसे लेकर पास कराने की कथित जानकारी भी सामने आई थी।
मामले में JPSC की परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी TDPL के कर्मचारियों और अन्य आरोपियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। CID की कार्रवाई लगातार बढ़ती गई है और कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अगस्त में अभय तिवारी की पत्नी और भाई की गिरफ्तारी की भी रिपोर्ट सामने आई थी।
पूर्व JPSC अध्यक्ष समेत कई नाम जांच में
JPSC घोटाला मामले में जांच का दायरा अब आयोग और परीक्षा संचालन से जुड़े उच्च स्तर तक पहुंच चुका है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पूर्व मुख्य सचिव और JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते, परीक्षा नियंत्रक स्वेता गुप्ता और अभय तिवारी समेत कई आरोपियों के खिलाफ जांच चल रही है। JPSC घोटाला मामले में CID ने अदालत के समक्ष विस्तृत केस डायरी भी पेश की है।
हालांकि, जांच में सामने आए आरोपों को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। JPSC घोटाला मामले में अदालत की प्रक्रिया जारी है और प्रत्येक आरोपी के खिलाफ आरोपों की न्यायिक जांच होना बाकी है।
JPSC घोटाला यानी हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर बड़ा सवाल
JPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में OMR रिकॉर्ड और डिजिटल सर्वर डेटा के बीच अंतर सामने आना परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अगर जांच में यह साबित होता है कि परीक्षा खत्म होने के बाद OMR शीट में उत्तर जोड़े गए, तो यह सिर्फ एक अभ्यर्थी की कथित मदद का मामला नहीं रहेगा, बल्कि पूरी परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठेगा।
CID की जांच अब कथित पैसों के लेनदेन, बिचौलियों के नेटवर्क, डिजिटल चैट, OMR शीट और सर्वर डेटा को जोड़कर पूरे नेटवर्क की भूमिका तलाश रही है। इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां तथा नए खुलासे होने की संभावना बनी हुई है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 48 उत्तर देने वाला अभ्यर्थी 99 उत्तरों वाली OMR शीट तक कैसे पहुंचा और इस कथित बदलाव को अंजाम देने में परीक्षा तंत्र के भीतर और बाहर कौन-कौन लोग शामिल थे।


