रांची : स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के अगले 25 वर्षों के विकास का खाका सामने रखते हुए कहा कि राज्य की असली ताकत उसके युवा, किसान, महिलाएं, आदिवासी समाज और प्राकृतिक-सांस्कृतिक विरासत हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड ऐसा राज्य बनेगा जहां विकास केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में दिखाई देगा। विकास के साथ प्रकृति, परंपरा और सामाजिक न्याय का संतुलन राज्य की पहचान बनेगा।
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केवल इतिहास याद करने का अवसर नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल इतिहास को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जिम्मेदारी तय करने का दिन है। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू, तिलका मांझी, चांद-भैरव, फूलो-झानो समेत झारखंड के महान नायकों को नमन करते हुए कहा कि उनके संघर्ष से मिली विरासत को आगे बढ़ाना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
युवाओं पर सबसे बड़ा दांव

मुख्यमंत्री ने युवाओं को झारखंड की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि उनकी मेहनत, प्रतिभा और सपनों को किसी भ्रष्ट तंत्र या अनियमितता के भरोसे नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि दोषी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, प्रमाण मिलने पर उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होगी, लेकिन बिना प्रमाण किसी को दोषी ठहराने की राजनीति भी नहीं की जाएगी।
सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार का निर्णय लिया है। इसके तहत समयबद्ध वार्षिक परीक्षा कैलेंडर, पारदर्शी और तकनीक-सुरक्षित परीक्षा प्रणाली, उत्तर-कुंजी एवं ओएमआर की समय पर उपलब्धता तथा परीक्षा प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित करने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी व्यवस्था तैयार की जाएगी जिसमें पारदर्शिता अपवाद नहीं, बल्कि नियम होगी।
‘छात्रों की बात-छात्रों के साथ’ अभियान
मुख्यमंत्री ने बताया कि परीक्षा सुधार के लिए ‘छात्रों की बात-छात्रों के साथ’ अभियान शुरू किया गया है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों, शिक्षाविदों और अभिभावकों के सुझाव लिए जाएंगे। सरकार विशेषज्ञों के साथ इन सुझावों का अध्ययन करेगी और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक बदलाव करेगी।
रोजगार केवल सरकारी नौकरी नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल रिक्त पदों को भरना नहीं, बल्कि ऐसा झारखंड बनाना है जहां उद्योग, एमएसएमई, कृषि, डेयरी, मत्स्य, पर्यटन, डिजिटल सेवाओं और स्टार्टअप के क्षेत्र में भी युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा हों।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जेपीएससी, जेएसएससी और अन्य भर्ती एजेंसियों के माध्यम से नियुक्ति प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि युवाओं को अवसर भी मिले और व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत हो।
अन्नदाता से कृषि-उद्यमी बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने किसानों को झारखंड की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव बताते हुए कहा कि खेती को केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में सरकार काम कर रही है। सिंचाई, बीज, समर्थन मूल्य और कृषि यंत्रीकरण के साथ-साथ फल, सब्जी, बागवानी, डेयरी, मत्स्य पालन, मुर्गी एवं बकरी पालन, मधुमक्खी पालन, लाह, तसर, मिलेट, औषधीय पौधों और लघु वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की योजना है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत लगभग 2.15 हजार एकड़ में पौधारोपण किया गया है और करीब तीन लाख परिवारों को आजीविका के नए माध्यमों से जोड़ा गया है। उत्पादित आम का विदेशों तक निर्यात होने का भी उल्लेख उन्होंने किया।
एमएसएमई बनेगा रोजगार का इंजन

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की आर्थिक शक्ति केवल बड़े उद्योगों से नहीं बनती। युवा, कारीगर, बुनकर, महिला स्वयं सहायता समूह, हस्तशिल्पी और छोटे उद्यमी झारखंड की अर्थव्यवस्था की वास्तविक ताकत हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में 16 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) हैं। इनमें आठ लाख से अधिक सूक्ष्म इकाइयां शामिल हैं, जो बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। सरकार का लक्ष्य स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना, प्रत्येक जिले में स्थानीय संसाधन आधारित उद्योग विकसित करना तथा युवाओं को अपने ही जिले में सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना है।
निवेश के लिए खुल रहा नया रास्ता
मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन का उल्लेख करते हुए कहा कि उद्योग, पर्यटन, आईटी, एआई, आधारभूत संरचना और कौशल विकास के क्षेत्रों में निवेश और नवाचार को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि प्रमुख कॉरपोरेट समूहों के साथ लगभग एक लाख करोड़ रुपये के निवेश के लिए 10 एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। सरकार के अनुसार, इन निवेश प्रस्तावों से राज्य के 22 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है।
महिलाओं के हाथ में आर्थिक ताकत

मुख्यमंत्री ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए ‘मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना’ का उल्लेख किया। भाषण के अनुसार, योजना के माध्यम से महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के साथ आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है और महिलाओं की उद्यमशीलता को बढ़ावा मिला है।
वहीं ‘सखी मंडल’ के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ाने की बात कही गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि तीन लाख से अधिक सखी मंडलों के गठन के माध्यम से करीब 35 लाख परिवारों को जोड़ा गया है। इन समूहों को चक्रीय निधि, सामुदायिक निवेश निधि और बैंक ऋण से जोड़ने की व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया।
गांव से मेडिकल कॉलेज तक बदलाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य केवल बीमारी का उपचार नहीं, बल्कि बेहतर जीवन की बुनियाद है। सरकार प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के साथ आधुनिक अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग शिक्षा, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और टेलीमेडिसिन पर काम कर रही है। उन्होंने राज्य के सभी पंचायतों को जेनेरिक दवा दुकान और एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही। साथ ही रिम्स-2 के निर्माण तथा पूर्वी सिंहभूम, खूंटी, गिरिडीह, देवघर, जामताड़ा और धनबाद में नए चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण का उल्लेख किया।
विकास आंकड़ों में नहीं, जिंदगी में दिखे
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में झारखंड के अगले 25 वर्षों का सपना भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, झारखंडी अस्मिता और आधुनिक प्रगति साथ-साथ आगे बढ़े, किसान सम्मान और समृद्धि के साथ जीवन जिएं, महिलाएं विकास की सहभागी ही नहीं बल्कि नेतृत्वकर्ता बनें, हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मिले और प्रत्येक नागरिक को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि झारखंड की प्राकृतिक संपदा का पहला लाभ राज्य के लोगों को मिलना चाहिए।
‘सबसे ज्यादा अपने युवाओं पर विश्वास’
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाला झारखंड वही युवा लिखेंगे, जो आज शिक्षा, कौशल, मेहनत और सपनों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने युवाओं से धैर्य और विश्वास बनाए रखने का आग्रह किया और कहा कि सरकार ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करेगी जिस पर अभ्यर्थी, समाज और पूरा देश भरोसा कर सके।

