रांची : झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून को चुनाव होने वाला है, इसे लेकर आज नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन है. सोमवार को महागठबंधन के दोनों उम्मीदवार जेएमएम के बैजनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा ने समर्थक विधायकों के साथ नामांकन दाखिल किया. जेएमएम उम्मीदवार बैजनाथ राम के प्रस्तावकों में सीएम हेमंत सोरेन शामिल थे तो वहीं कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के प्रस्तावकों में राजद विधायक शामिल थे.
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इससे पहले विधानसभा में नामांकन दाखिल करने को लेकर सोमवार सुबह से ही विधायकों का पहुंचना शुरू हो गया था. विधानसभा पहुंचने वालों में जेएमएम विधायक हेमलाल मुर्मू सबसे पहले नजर आए. इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में सत्ता पक्ष के विधायकों के एकजुट होने का भरोसा जताया. मुर्मू ने दावा किया कि इंडिया गठबंधन के पास दोनों सीटों की जीत के लिए पर्याप्त संख्या बल है और गठबंधन के दोनों ही उम्मीदवार आसानी से इस चुनाव में जीत दर्ज करेंगे.
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प्रणव झा के प्रस्तावक
वहीं, राष्ट्रीय जनता दल की ओर से भी स्थिति पूरी तरह साफ कर दी गई है. राजद नेता संजय सिंह यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राजद के सभी विधायक पूरी तरह से इंडिया गठबंधन के साथ एकजुट हैं. गठबंधन के भीतर आपसी समन्वय की तस्वीर पेश करते हुए उन्होंने बताया कि राजद विधायक दल के नेता सुरेश पासवान, मंत्री संजय यादव, विधायक नरेश सिंह ये तीनों नेता कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार प्रणव झा के प्रस्तावक बनें हैं. इस कदम से गठबंधन ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनके बीच किसी भी तरह का कोई मतभेद नहीं है.
बैजनाथ राम के प्रस्तावक
इसी बीच, झामुमो के राज्यसभा उम्मीदवार बैद्यनाथ राम भी विधानसभा पहुंचे. उन्होंने अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त दिखते हुए एक बड़ा अपडेट साझा किया. बैजनाथ राम ने बताया कि खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन उनके प्रस्तावक बने हैं. उन्होंने पूरे भरोसे के साथ कहा कि मुख्यमंत्री का साथ और गठबंधन की एकजुटता हमारे पास है. इंडिया गठबंधन के दोनों उम्मीदवारों की जीत पूरी तरह से सुनिश्चित है.
विधायकों का समीकरण
विधानसभा परिसर के अंदर और बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. सत्ता पक्ष जहां अपनी दोनों सीटें निकालने के लिए पूरी तरह आश्वस्त दिख रहा है. वहीं कड़े मुकाबले को देखते हुए पल-पल की रणनीति पर नजर रखी जा रही है. गठबंधन के नेताओं की ये बयानबाजी साफ करती है कि उन्होंने क्रॉस वोटिंग के किसी भी खतरे को टालने के लिए अपनी घेराबंदी मजबूत कर ली है.


