चंडीगढ़: चंडीगढ़ नगर निगम में हुए मेयर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बड़ी सफलता मिली है। भाजपा उम्मीदवार सौरभ जोशी को कुल 18 वोट मिले, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) को 11 वोट और कांग्रेस को 7 वोट मिले। इस तरह भाजपा ने साफ बहुमत के साथ मेयर पद पर कब्जा कर लिया। सौरभ जोशी चंडीगढ़ के नए और 29वें मेयर बने हैं। इस चुनाव की खास बात यह रही कि वोटिंग सीक्रेट बैलेट की बजाय हाथ उठाकर कराई गई। यह तरीका 1996 के बाद पहली बार अपनाया गया। प्रशासन ने यह फैसला पिछले चुनावों में हुए विवादों को देखते हुए लिया था ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
इस बार चुनाव इसलिए भी खास था क्योंकि पहली बार भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी तीनों ने अलग-अलग उम्मीदवार उतारे। पहले के चुनावों में कई बार विपक्षी दलों के बीच गठबंधन देखने को मिलता था, लेकिन इस बार विपक्ष बंटा रहा, जिसका फायदा भाजपा को मिला। चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल काफी तेज रही। भाजपा के पास नगर निगम में 18 पार्षदों का समर्थन था, जबकि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी मिलकर भी बराबरी की स्थिति में दिख रहे थे। ऐसे में चुनाव काफी रोमांचक माना जा रहा था।
चुनाव जीतने के बाद सौरभ जोशी ने भावुक होकर कहा कि उन्हें अपने परिवार, खासकर पिता के मार्गदर्शन से प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा कि वह शहर के विकास और जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देंगे। उन्होंने अपने वार्ड के बुजुर्गों और युवाओं का समर्थन मिलने पर आभार जताया। चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खुशी का माहौल देखा गया। पार्टी नेताओं ने इसे संगठन की मजबूती और पार्षदों की एकजुटता का परिणाम बताया।
वहीं विपक्षी दलों के लिए यह नतीजा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वोटों के बंटवारे से भाजपा को सीधा फायदा मिला। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत चंडीगढ़ की स्थानीय राजनीति में भाजपा की मजबूत स्थिति को दर्शाती है। आने वाले समय में नगर निगम की नीतियों और विकास योजनाओं पर इसका असर देखने को मिल सकता है। इस चुनाव के साथ ही सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के चुनाव भी चर्चा में रहे, जहां भी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज रही। कुल मिलाकर यह चुनाव चंडीगढ़ की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है और इसके नतीजों का असर भविष्य की स्थानीय राजनीति पर पड़ सकता है।


